Why People Giveup the Hope of Buying Home in India

Why People Giveup the Hope of Buying Home in India – 59% भारतीयों ने क्यों छोड़ दी घर खरीदने की उम्मीद? जानिए सट्टेबाजी और काले धन का पूरा खेल

Why People Giveup the Hope of Buying Home in India – 59% भारतीयों ने क्यों छोड़ दी घर खरीदने की उम्मीद? जानिए सट्टेबाजी और काले धन का पूरा खेल

क्या आपने भी हाल में यह महसूस किया है कि घर खरीदना अब सपना बनकर रह गया है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में 59% लोग अब घर खरीदने की उम्मीद छोड़ चुके हैं, और इसके पीछे सिर्फ बढ़ती कीमतें जिम्मेदार नहीं हैं। असल में, यह एक ऐसा सिस्टम बन गया है जहां सट्टेबाजी से धन कमाने वालों को बढ़ावा मिल रहा है और मध्यम वर्ग का सपना टूट रहा है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन कौशिक के एक वायरल पोस्ट में इस हकीकत को आंकड़ों के साथ सामने रखा गया। उन्होंने बताया कि कैसे पिछले 5 सालों में प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें दोगुनी हो गईं, जबकि औसत सैलरी में सिर्फ मामूली बढ़ोतरी हुई है। यही वजह है कि मध्यम वर्ग का व्यक्ति घर खरीदने का ख्वाब देखता तो है, लेकिन पूरा नहीं कर पाता।

कीमतें दोगुनी, सैलरी में मामूली बढ़ोतरी

पोस्ट के मुताबिक, 2018 में प्रॉपर्टी की कीमतें 5500 रुपये प्रति वर्गफुट थीं, जो 2023 में बढ़कर 11,000 रुपये प्रति वर्गफुट हो गईं। दूसरी ओर, औसत सैलरी 2019 में 1.35 लाख रुपये प्रति वर्ष थी, जो 2024 में बढ़कर 1.80 लाख रुपये प्रति वर्ष हुई, यानी सिर्फ 33% की बढ़ोतरी।

जबकि प्रॉपर्टी की कीमतें 100% बढ़ गईं, सैलरी में मामूली इजाफा होने से घर खरीदना लगभग असंभव हो गया है। इस बढ़ती असमानता ने भारत के रियल एस्टेट सेक्टर को सुरक्षा का जरिया बनने से अधिक, असमानता का गढ़ बना दिया है।

काले धन और सट्टेबाजी का खेल

पोस्ट में दावा किया गया कि रियल एस्टेट सेक्टर में काले धन का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 1 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी खरीदता है, तो 32.5 लाख रुपये टैक्स बनता है। लेकिन लोग प्रॉपर्टी को कम कीमत पर रजिस्ट्री कराते हैं और बाकी का पैसा कैश में दे देते हैं। इससे सरकार को सिर्फ 10% टैक्स ही मिल पाता है और काले धन का इस्तेमाल बढ़ता है।

यह सिस्टम आपको बेहतर कमाने नहीं, बल्कि सिस्टम को धोखा देना सिखाता है।

यह सिस्टम सिर्फ कुछ लोगों को फायदा पहुंचाता है, खासकर उन लोगों को जो प्री-लॉन्च में प्रॉपर्टी खरीदते हैं, टैक्स छूट पाने के लिए कृषि भूमि के सौदे करते हैं और फिर प्रॉपर्टी को बेचे बिना होल्ड करके रखते हैं। इस सट्टेबाजी और काले धन के खेल ने रियल एस्टेट को आम लोगों की पहुंच से बाहर कर दिया है।

मकान रहने के लिए नहीं, पैसा रखने का जरिया

आज प्रॉपर्टी खरीदना रहने के लिए नहीं, बल्कि पैसे रखने का तरीका बन गया है। अमीर लोग प्री-लॉन्च में फ्लैट खरीदते हैं, फिर ऊंचे दाम पर बेचते हैं और टैक्स छूट के लिए कानूनी loopholes का इस्तेमाल करते हैं। इसके कारण आम लोग, जो अपनी जिंदगी की कमाई से घर लेना चाहते हैं, वह पीछे रह जाते हैं।

गुड़गांव में कीमतें न्यूयॉर्क से भी ज्यादा

यह सुनने में अजीब लगे, लेकिन सच्चाई है कि गुड़गांव जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें न्यूयॉर्क से भी महंगी हो गई हैं। और यह कोई मजाक नहीं है। यही वजह है कि मध्यम वर्ग का व्यक्ति आज घर खरीदने का सपना देख तो रहा है, लेकिन हकीकत में वह इससे दूर होता जा रहा है।

क्यों टूट रहा है मध्यम वर्ग का सपना?

  • बढ़ती कीमतें: प्रॉपर्टी की कीमतें सैलरी से कई गुना तेजी से बढ़ी हैं।
  • काले धन का प्रभाव: काले धन का लेन-देन रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स चोरी को बढ़ावा देता है।
  • सट्टेबाजी का खेल: प्री-लॉन्च और टैक्स loopholes का इस्तेमाल करके अमीर तबका लगातार प्रॉपर्टी खरीद रहा है।
  • पॉलिसी गैप: सरकार और नीति-निर्माताओं के पास ऐसा कोई मजबूत सिस्टम नहीं है जो हाउसिंग सेक्टर में पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
  • आम आदमी की हार: मध्यम वर्ग की मेहनत और बचत बढ़ती कीमतों के आगे हार रही है।

सिस्टम क्यों फेल हो रहा है?

CA नितिन कौशिक के मुताबिक, यह सिस्टम मध्यम वर्ग के लिए कभी बना ही नहीं था। होम ओनरशिप जो कभी मध्यम वर्ग की पहचान थी, अब उसकी पहुंच से बाहर है। यह समस्या इसलिए नहीं है कि लोग मेहनत नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसलिए है क्योंकि यह खेल ही गलत तरीके से खेला जा रहा है।

समाधान क्या हो सकता है?

  • पारदर्शी टैक्स सिस्टम लागू किया जाए।
  • काले धन की एंट्री पर रोक लगे।
  • सट्टेबाजी पर सख्त नियंत्रण हो।
  • रियल एस्टेट कीमतों को स्थिर करने की नीति बने।
  • मध्यम वर्ग को सस्ती हाउसिंग के विकल्प दिए जाएं।

यदि सरकार इन मुद्दों पर ध्यान देती है, तो ही भविष्य में मध्यम वर्ग घर खरीदने का सपना फिर से देख पाएगा।

निष्कर्ष

भारत में रियल एस्टेट का खेल अब सट्टेबाजों और काले धन का केंद्र बनता जा रहा है, जिससे मध्यम वर्ग का घर खरीदने का सपना टूट रहा है। बढ़ती कीमतें, काले धन की एंट्री और गलत पॉलिसी ने घर खरीदने को एक सपने जैसा बना दिया है। जरूरत है कि इस सिस्टम को सुधारा जाए ताकि मेहनत करने वाला व्यक्ति भी अपने घर का सपना पूरा कर सके।

FAQs about Why People Giveup the Hope of Buying Home in India

भारत में 59% लोगों ने घर खरीदने की उम्मीद क्यों छोड़ी?

बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और कम सैलरी बढ़ोतरी के कारण।

पिछले 5 सालों में प्रॉपर्टी की कीमतों में कितना इजाफा हुआ?

दोगुना, यानी 5500 से 11,000 रुपये प्रति वर्गफुट तक।

औसत सैलरी कितनी बढ़ी है पिछले 5 सालों में?

सिर्फ 33% बढ़कर 1.80 लाख रुपये प्रति वर्ष हुई।

रियल एस्टेट में काले धन का कैसे इस्तेमाल होता है?

प्रॉपर्टी कम कीमत पर रजिस्ट्री कराकर बाकी का पैसा कैश में दिया जाता है।

सट्टेबाजी कैसे घर खरीदने में बाधा बन रही है?

अमीर लोग प्री-लॉन्च में प्रॉपर्टी खरीदकर ऊंचे दाम पर बेचते हैं और टैक्स बचाते हैं।

गुड़गांव में प्रॉपर्टी की कीमतें किससे ज्यादा हो गई हैं?

न्यूयॉर्क जैसी जगहों से भी महंगी हो गई हैं।

क्या मध्यम वर्ग घर खरीदने के लिए पर्याप्त कमा रहा है?

नहीं, उनकी सैलरी प्रॉपर्टी की कीमतों के मुकाबले बेहद धीमी बढ़ रही है।

भारत में घर खरीदने में सबसे बड़ी बाधा क्या है?

बढ़ती कीमतें और काले धन की एंट्री।

सिस्टम में बदलाव कैसे लाया जा सकता है?

पारदर्शी टैक्स सिस्टम, काले धन पर रोक और सट्टेबाजी पर नियंत्रण से।

क्या मध्यम वर्ग फिर से घर खरीदने का सपना पूरा कर पाएगा?

यदि पॉलिसी में सुधार हुआ, तो यह संभव है।

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  • vikas gupta

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