Bharat Mein Talent ki Kami – 50 लाख की नौकरी के लिए 1000 में 995 फेल, जानिए क्यों
अक्सर कहा जाता है कि भारत में टैलेंट की कमी नहीं है, लेकिन क्या यह बात सच है?
बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी Runable के सीईओ उमेश कुमार का अनुभव कुछ और ही कहानी बयां करता है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने बैकएंड इंजीनियर की एक पोस्ट निकाली, जिसके लिए सिर्फ 2-3 दिन में 1000 लोगों ने आवेदन कर दिया।
लेकिन 995 लोग पहले ही आसान से कोडिंग टेस्ट में फेल हो गए।
सीईओ ने क्यों कहा भारत में टैलेंट की भारी कमी है?
उमेश कुमार खुद IIT रुड़की से पढ़े हैं और उनकी कंपनी टेक इंडस्ट्री में काम करती है।
उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी का हायरिंग प्रोसेस बेहद सिंपल है:
सबसे पहले एक आसान कोडिंग टास्क दिया जाता है।
फिर 15 मिनट की CEO कॉल होती है।
उसके बाद 45 मिनट की CTO कॉल होती है।
इसके बाद एक दिन की पेड ट्रायल टीम के साथ होती है।
फिर कैंडिडेट को ऑफर लेटर जारी कर दिया जाता है।
उमेश कुमार ने कहा,
“हमारी कंपनी कोई बड़ी MNC नहीं है, लेकिन फिर भी 50 लाख रुपये तक की सैलरी, री-लोकेशन और फूड अलाउंस देती है। ऐसे में कम से कम उम्मीद तो रहती है कि कैंडिडेट ऐसा कोड लिख सके, जो चले तो सही।”
AI-जनरेटेड और खराब कोड की भरमार
उमेश ने बताया कि अधिकतर कैंडिडेट्स ने जो कोड सबमिट किया, वह या तो AI-जनरेटेड था, या खराब लिखा गया था, और चलता ही नहीं था।
उन्होंने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा,
“क्या ये मांग लेना ज्यादा है कि कोड कम से कम रन तो कर जाए?”
सोशल मीडिया पर क्या रहा रिएक्शन?
उनकी पोस्ट X (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हो गई, और अब तक 4 लाख से ज्यादा लोग इसे देख चुके हैं।
टेक कम्युनिटी में कई लोगों ने सहमति जताई:
एक यूजर ने लिखा, “आज कॉलेज के छात्र हर प्रोजेक्ट में ChatGPT और AI से कोड बनवा रहे हैं, इस वजह से स्किल आ ही नहीं रही।”
दूसरे ने लिखा, “बिना AI की मदद के आज की पीढ़ी एक सिंपल इंस्टाग्राम फीड भी नहीं बना सकती।”
हालांकि, कुछ लोगों ने हायरिंग प्रोसेस पर सवाल भी उठाए:
एक यूजर ने कहा, “पहले कोडिंग टास्क देना सही नहीं, इससे कई टैलेंटेड लोग जो डेस्परेट नहीं हैं, वो अप्लाई नहीं करते।”
एक सुझाव आया, “जॉब पोस्ट में CTC का रेंज लिखना चाहिए ताकि सीरियस लोग ही अप्लाई करें।”
असल वजह क्या है भारत में स्किल्ड टैलेंट की कमी की?
NASSCOM और TeamLease Digital की रिपोर्ट्स पहले ही यह संकेत दे चुकी हैं:
2026 तक भारत को 35 लाख डिजिटल स्किल वाले प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी।
अगले 18 महीनों में AI और नई टेक्नोलॉजी से जुड़े 9 लाख से ज्यादा नए जॉब्स आने वाले हैं।
भारत में AI प्रोडक्ट्स पर काम करने लायक सिर्फ 2000 सीनियर इंजीनियर्स हैं।
इसका मतलब यह है कि जॉब्स की कमी नहीं है, बल्कि स्किल्स की कमी है।
कई इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स डिग्री लेकर निकल तो रहे हैं, लेकिन इंडस्ट्री में काम करने लायक स्किल्स उनके पास नहीं हैं।
क्यों जरूरी है रियल वर्ल्ड कोडिंग स्किल
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स मानते हैं कि:
यूनिवर्सिटीज को इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
स्टूडेंट्स को सिर्फ थ्योरी नहीं, बल्कि असली कोडिंग प्रोजेक्ट्स पर काम करना सिखाना चाहिए।
कॉलेज लेवल पर ही साइड प्रोजेक्ट्स और इंटर्नशिप कराई जानी चाहिए।
AI का इस्तेमाल सीखने के लिए किया जाए, न कि सिर्फ सबमिशन के लिए।
समाधान क्या है?
छात्रों को खुद प्रैक्टिकल कोडिंग प्रोजेक्ट्स बनाने की आदत डालनी होगी।
कॉलेजों में एंटरप्रेन्योरशिप और प्रोडक्ट-बिल्डिंग पर फोकस बढ़ाना होगा।
AI टूल्स को गाइड की तरह इस्तेमाल कर सीखने की आदत डालनी होगी।
कंपनियों को हायरिंग में केवल मार्क्स या डिग्री नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट्स और प्रैक्टिकल स्किल्स देखनी होंगी।
इस स्टोरी से क्या सीख मिलती है?
भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है, लेकिन स्किल्स और इंडस्ट्री की डिमांड में अंतर है। अगर आप टेक में करियर बनाना चाहते हैं तो अभी से असली दुनिया की प्रॉब्लम्स को हल करना सीखें, प्रोजेक्ट्स बनाएं और AI की मदद सीखने के लिए लें, न कि उससे कोड कॉपी-पेस्ट करने के लिए।
उमेश कुमार का अनुभव इंडस्ट्री की एक हकीकत को उजागर करता है:
अच्छे पैकेज और जॉब्स के मौके तो हैं, लेकिन स्किल्ड लोग कम हैं।
FAQ Bharat mein Talent ki Kami
किस कंपनी के सीईओ ने यह बयान दिया?
बेंगलुरु की Runable कंपनी के सीईओ उमेश कुमार ने।
किस पोस्ट के लिए हायरिंग की गई थी?
बैकएंड इंजीनियर की पोस्ट के लिए।
कितने लोगों ने अप्लाई किया था?
करीब 1000 लोगों ने अप्लाई किया।
कितने लोग पास हो पाए?
सिर्फ 5 से कम लोग टेस्ट पास कर पाए।
क्यों फेल हुए कैंडिडेट्स?
क्योंकि कोड AI जनरेटेड या खराब था और रन नहीं कर रहा था।
कंपनी किस रेंज की सैलरी ऑफर कर रही थी?
50 लाख रुपये तक की सैलरी और अन्य सुविधाएं।
हायरिंग प्रोसेस कैसा था?
आसान कोडिंग टास्क, CEO कॉल, CTO कॉल, पेड ट्रायल और ऑफर लेटर।
लोगों ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
कई लोगों ने सहमति जताई, कुछ ने हायरिंग प्रोसेस पर सवाल उठाए।
भारत में स्किल गैप की क्या स्थिति है?
2026 तक 35 लाख डिजिटल स्किल प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी, लेकिन स्किल्ड टैलेंट की कमी है।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
जॉब्स की कमी नहीं, स्किल्स की कमी है; सीखने और प्रैक्टिकल स्किल्स बढ़ाने पर ध्यान देना जरूरी है।
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