Things to Check before Buying Health Insurance India – Health Insurance लेते वक्त ज़रा सी गलती पड़ सकती है भारी – जानिए क्या जरूर जांचें
आजकल इलाज सस्ता नहीं, लेकिन एक छोटी सी समझदारी से अस्पताल का बड़ा बिल बचाया जा सकता है – बस सही Health Insurance चुनना आना चाहिए।
“हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना आसान है, लेकिन सही प्लान चुनना समझदारी है।”
महंगे होते इलाज, बढ़ते मेडिकल बिल्स और स्वास्थ्य जोखिमों के बीच हेल्थ इंश्योरेंस अब एक विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुका है। लेकिन कई लोग जल्दबाज़ी या कम जानकारी में गलत पॉलिसी चुन लेते हैं और फिर क्लेम रिजेक्ट होने या इलाज में दिक्कत जैसी समस्याएं उठानी पड़ती हैं।
इसलिए अगर आप भी हेल्थ इंश्योरेंस लेने जा रहे हैं, तो इन 6 अहम बातों का ध्यान जरूर रखें:
-
कौन-कौन सी बीमारियां होंगी कवर?
हर हेल्थ पॉलिसी में अलग-अलग बीमारियों और मेडिकल कंडीशन्स का कवरेज होता है। आपको यह साफ तौर पर जांचना चाहिए कि:
- क्या गंभीर बीमारियां (Critical Illnesses) शामिल हैं?
- क्या आपके परिवार में पहले से चल रही बीमारियों को शामिल किया गया है?
- हॉस्पिटलाइजेशन, डे केयर, एंबुलेंस चार्ज आदि कितनी हद तक कवर हैं?
टिप: ज्यादा से ज्यादा कवर देने वाली पॉलिसी को प्राथमिकता दें।
-
नो-क्लेम बोनस (NCB) कितना मिलेगा?
अगर आपने किसी साल में क्लेम नहीं किया, तो बीमा कंपनी अगले साल आपके Sum Insured में बोनस जोड़ती है – इसे ही No Claim Bonus कहते हैं।
उदाहरण: अगर आपका Sum Insured ₹5 लाख है और NCB 50% है, तो अगले साल ये ₹7.5 लाख हो सकता है।
जरूरी:
पूछें कि NCB कैसे बढ़ेगा – % या फ्लैट रेट में
यह Maximum कितने साल तक मिलेगा?
-
वेटिंग पीरियड क्या है?
Pre-existing diseases जैसे डायबिटीज, BP, थायरॉइड, आदि के लिए पॉलिसी लेते ही कवरेज नहीं मिलता। इसके लिए एक तय वेटिंग पीरियड होता है – आमतौर पर 2 से 4 साल।
चेक करें:
पॉलिसी में कौन-कौन सी बीमारियां वेटिंग पीरियड में हैं?
कितने समय बाद इनका कवरेज शुरू होगा?
-
पॉलिसी में क्या-क्या नहीं कवर होता?
हर पॉलिसी में कुछ Exclusions होते हैं – यानी वो चीजें जो कवरेज में नहीं आतीं।
जैसे:
- कॉस्मेटिक सर्जरी
- मेडिकल टूरिज्म
- नॉन-ऑलोपैथिक इलाज
- HIV/AIDS
- मानसिक रोग (कुछ मामलों में)
अडवाइस: इन बातों को बारीकी से पढ़ें ताकि बाद में क्लेम रिजेक्ट होने पर आपको झटका न लगे।
-
क्लेम सेटलमेंट रेशो (CSR) कैसा है?
CSR यानी Claim Settlement Ratio बताता है कि इंश्योरेंस कंपनी ने कुल कितने क्लेम में से कितने सफलतापूर्वक निपटाए।
- Ex: CSR 97% का मतलब – 100 में से 97 क्लेम पास किए गए।
- हमेशा इन कंपनियों को चुनें:
- जिनका CSR 90% से ऊपर हो
- जो तेज और hassle-free प्रोसेस देती हों
- जिनकी customer service भरोसेमंद हो
-
आपके आसपास कौन-कौन से Partner Hospital हैं?
Cashless Hospitalization तभी मुमकिन है जब आपके नजदीक का हॉस्पिटल उस इंश्योरेंस कंपनी से टाईअप में हो।
जांचें:
क्या आपके शहर/इलाके का अच्छा अस्पताल शामिल है?
24×7 इमरजेंसी फैसिलिटी है या नहीं?
क्या आपको हायर क्लास रूम/ICU में कवरेज मिलेगा?
Bonus Tips:
- Co-pay clause देखें – आपको कितना खर्च खुद उठाना होगा
- Room Rent Limit कितना है – इससे बिल क्लेम करने में फर्क पड़ता है
- OPD और Day-care Coverage है या नहीं?
क्या परिवार के लिए Floater Plan लेना ज्यादा फायदेमंद रहेगा?
FAQs: हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े 10 जरूरी सवाल
Q1. हेल्थ इंश्योरेंस की मिनिमम उम्र क्या होती है?
A: 18 साल, लेकिन बच्चों के लिए 91 दिन से पॉलिसी शुरू की जा सकती है।
Q2. क्या सिंगल पॉलिसी पूरे परिवार के लिए ले सकते हैं?
A: हां, Family Floater Plan के जरिए पूरे परिवार को कवर किया जा सकता है।
Q3. क्या हेल्थ इंश्योरेंस टैक्स में छूट देता है?
A: हां, धारा 80D के तहत ₹25,000 से ₹1 लाख तक की छूट मिलती है।
Q4. हेल्थ चेकअप का खर्च भी कवर होता है?
A: कई पॉलिसी में हर 2-3 साल बाद फ्री हेल्थ चेकअप का विकल्प होता है।
Q5. क्लेम प्रोसेस में कितना समय लगता है?
A: सामान्यत: 7–15 दिन, लेकिन कुछ में 24-48 घंटे में कैशलेस क्लेम हो जाता है।
Q6. क्या सभी बीमारियां तुरंत कवर होती हैं?
A: नहीं, कुछ के लिए वेटिंग पीरियड होता है।
Q7. क्या कंपनी कभी क्लेम रिजेक्ट कर सकती है?
A: हां, अगर बीमा लेते समय झूठी जानकारी दी हो या एक्सक्लूजन की स्थिति हो।
Q8. क्या हेल्थ इंश्योरेंस प्लान बदल सकते हैं?
A: हां, आप पोर्टिंग करके कंपनी या प्लान बदल सकते हैं।
Q9. क्या हेल्थ इंश्योरेंस में प्रीमियम सालाना देना होता है?
A: हां, लेकिन कुछ कंपनियां मंथली या क्वार्टरली विकल्प भी देती हैं।
Q10. क्या सरकारी हॉस्पिटल में भी क्लेम मिल सकता है?
A: नहीं, अधिकतर कैशलेस सुविधा प्राइवेट हॉस्पिटल्स में ही मिलती है।
Thanks for visiting – Chandigarh News

