Foreign Affairs – Chandigarh News https://chandigarhnews.net Latest Chandigarh News Wed, 30 Jul 2025 12:12:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://chandigarhnews.net/wp-content/uploads/2025/04/chandigarh-news-logo-1.png Foreign Affairs – Chandigarh News https://chandigarhnews.net 32 32 China Russia से जुड़े 11,000 YouTube चैनल हटाए गए, जानिए क्यों एक्शन लेने पर मजबूर हुआ Google https://chandigarhnews.net/china-russia/ https://chandigarhnews.net/china-russia/#respond Mon, 28 Jul 2025 09:11:12 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=63467 China Russia से जुड़े 11,000 YouTube चैनल हटाए गए, जानिए क्यों एक्शन लेने पर मजबूर हुआ Google टेक दिग्गज गूगल

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China Russia से जुड़े 11,000 YouTube चैनल हटाए गए, जानिए क्यों एक्शन लेने पर मजबूर हुआ Google

टेक दिग्गज गूगल ने अप्रैल से जून 2025 के बीच चीन और रूस से जुड़े करीब 11,000 YouTube चैनल और अन्य अकाउंट्स अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिए हैं। इन चैनलों पर भ्रामक जानकारी और प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप था, जिनका मकसद वैश्विक स्तर पर लोगों की सोच को प्रभावित करना और फर्जी सूचनाएं फैलाना था।

क्या था इन चैनलों का मकसद?

चीन से जुड़े 7,700 से ज्यादा चैनल लगातार चीनी और अंग्रेजी भाषा में कंटेंट डाल रहे थे।

इन चैनलों पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तारीफ, अमेरिकी विदेश नीति की आलोचना और चीन समर्थित नैरेटिव को बढ़ावा दिया जा रहा था।

रूस से जुड़े 2,000 से ज्यादा चैनल यूक्रेन, NATO और पश्चिमी देशों के खिलाफ कंटेंट पोस्ट कर रहे थे और रूस समर्थक विचारधारा फैला रहे थे।

कुछ चैनल RT (रशिया टुडे) जैसे राज्य नियंत्रित मीडिया नेटवर्क से भी जुड़े थे, जिन्हें 2022 में YouTube पर बैन किया जा चुका है।

और किन देशों से जुड़े थे ये अभियान?

गूगल ने बताया कि ईरान, तुर्की, अजरबैजान, इजराइल, रोमानिया और घाना जैसे देशों से भी प्रभाव अभियानों को अंजाम दिया जा रहा था।

इन अभियानों का मकसद:

  • राजनीतिक विरोधियों को बदनाम करना
  • जनता की सोच को प्रभावित करना
  • सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाना था।

आंकड़ों में कार्रवाई

  • 2025 की पहली तिमाही में गूगल ने 23,000 से ज्यादा अकाउंट्स हटाए थे।
  • दूसरी तिमाही में यह संख्या 30,000 से ज्यादा हो गई।
  • साथ ही, कई वेबसाइट्स को Google News और Discover से भी हटाया गया है।

Google ने क्या कहा?

यह कार्रवाई गूगल के Threat Analysis Group (TAG) ने की है, जो दुनियाभर में फर्जी सूचनाओं और प्रोपेगेंडा अभियानों पर नजर रखता है। गूगल ने कहा,

“यह कार्रवाई नियमित और हमारी अपेक्षित प्रक्रिया का हिस्सा है ताकि प्लेटफॉर्म को विश्वसनीय और सुरक्षित रखा जा सके।”

क्यों जरूरी था यह कदम?

दुनियाभर में गलत जानकारी फैलाने के लिए सोशल मीडिया और यूट्यूब का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

चीन और रूस जैसे देश अपने नैरेटिव को फैलाने के लिए सोशल मीडिया को टूल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

इससे लोकतांत्रिक देशों में जनता की सोच और चुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

फर्जी खबरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से सोशल मीडिया यूजर्स को सुरक्षित और सही जानकारी मिलती है।

निष्कर्ष

गूगल का यह एक्शन इस बात का संकेत है कि टेक कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर फर्जी सूचनाओं के खिलाफ सख्त कदम उठा रही हैं। चीन और रूस से जुड़े इन अभियानों को रोकने का मतलब है कि YouTube और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स को बेहतर और सही जानकारी मिलेगी।

अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें। इससे उन्हें भी फर्जी खबरों से सतर्क रहने में मदद मिलेगी।

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Free Trade Agreement – ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड से बुलेट की रफ्तार से दौड़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था, जानें 15 बड़े फायदे https://chandigarhnews.net/free-trade-agreement/ https://chandigarhnews.net/free-trade-agreement/#respond Mon, 28 Jul 2025 06:54:44 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=63424 Free Trade Agreement – ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड से बुलेट की रफ्तार से दौड़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था, जानें 15

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Free Trade Agreement – ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड से बुलेट की रफ्तार से दौड़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था, जानें 15 बड़े फायदे

अगर आप सोचते हैं कि फ्री ट्रेड डील सिर्फ सरकारी आंकड़े भर हैं, तो यह खबर आपकी सोच बदल देगी। ब्रिटेन और भारत के बीच हुआ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भारत की अर्थव्यवस्था को बुलेट ट्रेन जैसी रफ्तार देने जा रहा है। इससे न केवल किसानों और छोटे कारोबारियों को फायदा होगा, बल्कि आपके अपने शहर की इंडस्ट्री, एमएसएमई और आईटी सेक्टर तक को सीधा लाभ मिलेगा।

आइए, 15 बिंदुओं में सरल भाषा में समझते हैं कैसे यह डील भारत के लिए गेम चेंजर साबित होने वाली है।

कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयां

ब्रिटेन में फल, सब्जियां, अनाज, मसाले, दालें और प्रोसेस्ड फूड अब बिना किसी शुल्क के एक्सपोर्ट हो सकेंगे। इससे किसानों की आमदनी बढ़ने का रास्ता खुलेगा।

  • 95% कृषि उत्पादों पर जीरो ड्यूटी
  • 20% तक कृषि निर्यात बढ़ने की उम्मीद
  • बाजरा, कटहल और ऑर्गेनिक हर्ब्स जैसे उत्पादों को नया बाजार मिलेगा।
  • प्रमाणीकरण प्रक्रिया आसान होगी, जिससे लागत और समय दोनों बचेंगे।
  • आंध्र प्रदेश, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु के समुद्री किसानों को भी लाभ।

समुद्री उत्पादों को नई उड़ान

  • झींगा, टूना और मछली जैसे समुद्री उत्पाद ब्रिटेन में अब जीरो ड्यूटी पर बिकेंगे।
  • तटीय इलाकों के मछुआरों को सीधे फायदा।
  • वर्तमान में भारत की 25% हिस्सेदारी है, जिससे अब बड़ा स्कोप खुलेगा।
  • निर्यातकों की इनकम में सीधा इजाफा होगा।

चाय और कॉफी के लिए नया बाजार

  • भारतीय चाय, कॉफी और मसाले अब ब्रिटेन में बिना शुल्क के बिकेंगे।
  • इंस्टेंट कॉफी पर फोकस, जिससे यूरोपीय बाजार में भारत की पकड़ मजबूत होगी।

तिलहन और इसके उत्पाद

  • शुल्क मुक्त एक्सपोर्ट से भारतीय तिलहन उत्पाद ब्रिटेन में प्रतिस्पर्धा में आगे निकलेंगे।

वस्त्र और परिधान

  • 1,143 टेक्सटाइल कैटेगरी के उत्पादों पर शून्य शुल्क।
  • बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों के बराबर भारत को लाभ।
  • हस्तशिल्प, कालीन, घरेलू वस्त्र और आरएमजी के निर्यात में तेजी।
  • अगले 1-2 साल में 5% मार्केट शेयर बढ़ने की उम्मीद।

इंजीनियरिंग और मशीनरी

  • ब्रिटेन भारत का छठा सबसे बड़ा इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट बाजार है।
  • मौजूदा 28 अरब डॉलर के निर्यात को 2029 तक 7.5 अरब डॉलर करने का लक्ष्य।
  • इलेक्ट्रिक मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और औद्योगिक उपकरण के निर्यात में सालाना 12% ग्रोथ की उम्मीद।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर

  • स्मार्टफोन, ऑप्टिकल फाइबर, इनवर्टर पर शून्य शुल्क।
  • सॉफ्टवेयर सेवाओं में 15-20% सालाना ग्रोथ संभावित, फिलहाल 32 अरब डॉलर का व्यापार।

फार्मा और मेडिकल उपकरण

  • भारतीय जेनेरिक दवाओं को ब्रिटेन में बड़ी एंट्री।
  • एक्स-रे, ईसीजी और सर्जिकल उपकरणों पर जीरो ड्यूटी।

केमिकल्स और संबद्ध उत्पाद

  • रसायन उत्पादों के निर्यात में 30-40% तक की वृद्धि की संभावना।
  • ब्रिटेन में वर्तमान 3 करोड़ डॉलर के निर्यात को बड़ा स्कोप मिलेगा।

प्लास्टिक उत्पाद

  • पाइप, फिल्म, पैकेजिंग, टेबलवेयर पर शुल्क फ्री एक्सपोर्ट।
  • अगले 5 वर्षों में 7 करोड़ डॉलर का टारगेट।

खेल सामग्री और खिलौने

  • क्रिकेट गियर, रग्बी बॉल और नॉन-इलेक्ट्रॉनिक टॉयज के निर्यात में उछाल।
  • चीन और वियतनाम पर भारत को बढ़त।

रत्न और आभूषण

  • वर्तमान 1 करोड़ डॉलर के निर्यात में 40 करोड़ डॉलर आभूषण का योगदान।
  • शुल्क छूट से अगले 2-3 साल में दोगुना निर्यात की संभावना।

चमड़ा और फुटवियर

  • 16% शुल्क हटाया गया।
  • आगरा, कानपुर, चेन्नई, कोल्हापुर जैसे एमएसएमई हब को सीधा लाभ।
  • निर्यात 90 करोड़ डॉलर के पार जाने की उम्मीद।

सेवा क्षेत्र को मिलेगा बूस्ट

  • योग ट्रेनर, शेफ, क्लासिकल आर्टिस्ट्स को ब्रिटेन में काम करने में आसानी।
  • सर्विस सप्लायर के लिए आसान प्रोसेस।

अन्य बड़े फायदे

  • भारत के 99% प्रोडक्ट्स पर ब्रिटेन में शून्य शुल्क मिलेगा।
  • प्रोसेस्ड फूड पर 70% शुल्क घटाकर जीरो कर दिया गया है।
  • श्रम प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र, समुद्री उत्पाद, रसायन और धातु क्षेत्र को राहत।

निष्कर्ष: क्यों यह डील भारत के लिए गेम चेंजर है?

इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत को न केवल अपने प्रोडक्ट्स के लिए नया बाजार मिलेगा, बल्कि एमएसएमई सेक्टर, किसानों और मछुआरों की कमाई बढ़ाने का मौका भी मिलेगा।

भारत की अर्थव्यवस्था को बुलेट ट्रेन जैसी रफ्तार मिलने में यह डील बड़ी भूमिका निभाएगी।

इसका फायदा उठाने के लिए एक्सपोर्टर्स को ब्रिटेन में नए कस्टमर बेस बनाने पर फोकस करना होगा, ताकि भारत के प्रोडक्ट्स ग्लोबल मार्केट में और तेजी से पहुंच सकें।

FAQ: भारत-ब्रिटेन फ्री ट्रेड डील को लेकर सवाल

Q1: यह फ्री ट्रेड डील किसके बीच हुई है?

A: भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता हुआ है।

Q2: इससे किसानों को कैसे फायदा होगा?

A: फलों, सब्जियों और कृषि उत्पादों पर ब्रिटेन में जीरो ड्यूटी होगी, जिससे निर्यात और किसानों की कमाई बढ़ेगी।

Q3: क्या समुद्री उत्पाद भी शामिल हैं?

A: हां, झींगा, टूना और मछली जैसे सभी समुद्री उत्पाद शुल्क मुक्त हो जाएंगे।

Q4: टेक्सटाइल इंडस्ट्री को क्या लाभ होगा?

A: 1,143 प्रोडक्ट कैटेगरी पर शून्य शुल्क, जिससे निर्यात बढ़ेगा।

Q5: क्या सर्विस सेक्टर को भी फायदा होगा?

A: हां, योग ट्रेनर, शेफ, कलाकारों को ब्रिटेन में काम करने में आसानी होगी।

Q6: फार्मा इंडस्ट्री को क्या फायदा होगा?

A: भारतीय जेनेरिक दवाओं और मेडिकल उपकरणों को ब्रिटेन में एक्सपोर्ट में फायदा होगा।

Q7: एमएसएमई सेक्टर को कैसे मदद मिलेगी?

A: चमड़ा, फुटवियर, हैंडीक्राफ्ट, टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों के एमएसएमई को एक्सपोर्ट में लाभ होगा।

Q8: इससे रोजगार पर क्या असर पड़ेगा?

A: निर्यात बढ़ने से एमएसएमई और सर्विस सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

Q9: कितने प्रतिशत प्रोडक्ट्स पर जीरो ड्यूटी मिलेगी?

A: 99% भारतीय प्रोडक्ट्स पर ब्रिटेन में शून्य शुल्क लगेगा।

Q10: क्या छोटे व्यापारी भी इसका फायदा उठा सकते हैं?

A: हां, छोटे एक्सपोर्टर्स और किसान भी इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।

क्या आपको लगता है यह डील भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बुलेट ट्रेन जैसी रफ्तार लाएगी? अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर बताएं। इस जानकारी को शेयर करें ताकि ज्यादा लोग इस अवसर का फायदा उठा सकें।

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Buy House in France for 100 Rupee – विदेश में सिर्फ 100 रुपये में खरीदें घर! फ्रांस के इस शहर में आपके सपनों का घर पाने का मौका https://chandigarhnews.net/buy-house-in-france-for-100-rupee/ https://chandigarhnews.net/buy-house-in-france-for-100-rupee/#respond Mon, 28 Jul 2025 05:55:37 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=63425 Buy House in France for 100 Rupee – विदेश में सिर्फ 100 रुपये में खरीदें घर! फ्रांस के इस शहर

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Buy House in France for 100 Rupee – विदेश में सिर्फ 100 रुपये में खरीदें घर! फ्रांस के इस शहर में आपके सपनों का घर पाने का मौका

क्या आप भी विदेश में घर खरीदने का सपना देखते हैं लेकिन महंगाई देखकर पीछे हट जाते हैं? अब आपको निराश होने की जरूरत नहीं है। फ्रांस का एम्बर्ट (Ambert) शहर आपके लिए सिर्फ 1 यूरो (करीब 100 रुपये) में घर खरीदने का सुनहरा मौका लेकर आया है।

यह ऑफर सुनने में किसी कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह 100% सच है। एम्बर्ट की नगरपालिका ने यह स्कीम इसलिए शुरू की है ताकि शहर में जनसंख्या बढ़ाई जा सके और खाली पड़े घरों का इस्तेमाल हो सके।

क्यों कर रहा है फ्रांस यह ऑफर?

फ्रांस के कई छोटे शहरों में जनसंख्या कम होने लगी है, जिससे स्कूल, दुकानों और अन्य पब्लिक फैसिलिटीज पर असर पड़ रहा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए एम्बर्ट शहर ने 1 यूरो में घर देने की योजना लागू की है।

इस योजना के उद्देश्य:

  • खाली घरों का उपयोग करना
  • स्थानीय स्कूलों और दुकानों को फिर से सक्रिय करना
  • शहर में आर्थिक गतिविधि बढ़ाना
  • नए नागरिकों को आकर्षित करना

क्या शर्तें हैं इस योजना में?

सिर्फ 100 रुपये में घर मिलने का ऑफर सुनकर खुशी तो होती है, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी हैं:

रिनोवेशन अनिवार्य:

खरीदने के बाद घर की मरम्मत कराना अनिवार्य है ताकि वह मॉडर्न लिविंग स्टैंडर्ड्स के हिसाब से हो सके।

कम से कम 3 साल निवास करना होगा:

आपको इस घर में कम से कम 3 साल तक रहना होगा ताकि मकान को सिर्फ बेचने के लिए न खरीदा जाए, बल्कि वहां की कम्युनिटी का हिस्सा बना जा सके।

स्थानीय नियमों का पालन:

रिनोवेशन का कार्य तय समय सीमा में पूरा करना होगा और वह स्थानीय बिल्डिंग कोड्स के अनुरूप होना चाहिए।

लो-इंटरेस्ट लोन और ग्रांट्स की सुविधा:

रिनोवेशन के लिए आपको लो-इंटरेस्ट लोन और सरकारी ग्रांट्स भी मिल सकते हैं ताकि आपकी जेब पर ज्यादा बोझ न पड़े।

कौन कर सकता है अप्लाई?

इस योजना का सबसे खास पहलू यह है कि विदेशी नागरिक भी इस योजना के लिए अप्लाई कर सकते हैं। यानी अगर आप भारत में रहते हुए भी विदेश में घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो एम्बर्ट शहर आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

एम्बर्ट शहर में क्या खास है?

फ्रांस का यह छोटा सा शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत, शांत वातावरण और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यहां रहने पर आपको फ्रांस की असली खूबसूरती और यूरोपियन लाइफस्टाइल का अनुभव मिलेगा।

  • खूबसूरत घाटियां और पहाड़
  • फ्रेंच कल्चर और फूड
  • शांत और सुरक्षित वातावरण
  • वर्क फ्रॉम होम के लिए शानदार लोकेशन

इस योजना का असर क्या दिख रहा है?

एम्बर्ट में इस स्कीम के लागू होने के बाद कुछ स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी है और स्थानीय दुकानों की बिक्री भी बेहतर हुई है। यह योजना शहर में नई जान फूंकने में सफल हो रही है।

FAQs: फ्रांस में 100 रुपये में घर कैसे खरीदें?

Q1: क्या सच में फ्रांस में 100 रुपये में घर मिल रहा है?

A: हां, एम्बर्ट शहर में सिर्फ 1 यूरो (100 रुपये) में घर खरीदा जा सकता है।

Q2: इसके लिए कौन-कौन अप्लाई कर सकता है?

A: कोई भी विदेशी नागरिक इस योजना के लिए अप्लाई कर सकता है।

Q3: क्या घर खरीदने के बाद रिनोवेशन करना जरूरी है?

A: हां, घर को मॉडर्न लिविंग के हिसाब से रिनोवेट करना अनिवार्य है।

Q4: रिनोवेशन में कितना खर्च आ सकता है?

A: यह घर की हालत पर निर्भर करता है, लेकिन लो-इंटरेस्ट लोन और सरकारी ग्रांट्स से मदद मिल सकती है।

Q5: क्या वहां कम से कम 3 साल रहना जरूरी है?

A: हां, आपको कम से कम 3 साल तक उस घर में रहना होगा।

Q6: अगर मैं वहां नहीं रह सका तो क्या होगा?

A: अगर आप शर्तों का पालन नहीं करते तो घर वापस ले लिया जा सकता है।

Q7: क्या यह घर बेच सकते हैं?

A: 3 साल तक रहने के बाद नियमों के अनुसार बेचा जा सकता है।

Q8: इस स्कीम का उद्देश्य क्या है?

A: खाली घरों का उपयोग करना और शहर में जनसंख्या बढ़ाना।

Q9: क्या इस स्कीम में कोई छुपा खर्च है?

A: घर खरीदने में तो सिर्फ 1 यूरो लगेगा, लेकिन रिनोवेशन और रहने का खर्च आपका होगा।

Q10: अप्लाई करने के लिए कहां संपर्क करें?

A: एम्बर्ट शहर की नगरपालिका की वेबसाइट पर जाकर आवेदन किया जा सकता है।

निष्कर्ष

अगर आप विदेश में सस्ती कीमत पर घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो फ्रांस का एम्बर्ट शहर आपके लिए बेहतरीन मौका लेकर आया है। सिर्फ 100 रुपये में घर खरीदने का यह मौका आपके सपनों को साकार कर सकता है, बशर्ते आप शर्तों और जिम्मेदारियों को पूरा कर सकें।

इस स्कीम से ना सिर्फ आपको विदेश में घर मिलेगा, बल्कि वहां की खूबसूरत और शांत लाइफस्टाइल का आनंद भी उठा सकेंगे।

क्या आप भी विदेश में घर खरीदना चाहते हैं? अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर बताएं।

यह जानकारी दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें ताकि वे भी इस सुनहरे मौके का फायदा उठा सकें।

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Poorest person of the World – दुनिया का सबसे गरीब आदमी: करोड़ों में खेलने वाला जेरोम केर्विएल कैसे बना 495000 करोड़ का कर्जदार? https://chandigarhnews.net/poorest-person-of-the-world/ https://chandigarhnews.net/poorest-person-of-the-world/#respond Sat, 26 Jul 2025 11:07:01 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=63399 Poorest person of the World – दुनिया का सबसे गरीब आदमी: करोड़ों में खेलने वाला जेरोम केर्विएल कैसे बना 495000

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Poorest person of the World – दुनिया का सबसे गरीब आदमी: करोड़ों में खेलने वाला जेरोम केर्विएल कैसे बना 495000 करोड़ का कर्जदार?

जब भी ‘गरीब’ शब्द हमारे कानों में पड़ता है, दिमाग में झोपड़ी, फटे कपड़े और सूनी आंखों वाला चेहरा उभर आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया का सबसे गरीब आदमी वही हो सकता है जिसने कभी अरबों की डील की हो? यह कहानी है फ्रांस के जेरोम केर्विएल (Jerome Kerviel) की, जो आज करीब 495000 करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा हुआ है, और दुनिया का सबसे गरीब आदमी कहलाता है।

कौन है जेरोम केर्विएल?

जेरोम का जन्म 11 जनवरी 1977 को फ्रांस के छोटे से कस्बे पोंट-एल-आबे में हुआ था। उनके पिता लोहार और मां हेयरड्रेसर थीं। एक सामान्य परिवार से आने वाले जेरोम ने कड़ी मेहनत से पढ़ाई की और ल्युमरे यूनिवर्सिटी, ल्योन से फाइनेंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद उनकी किस्मत ने करवट ली और उन्हें फ्रांस के तीसरे सबसे बड़े बैंक Societe Generale में नौकरी मिल गई।

जब करोड़ों में खेलने लगा जेरोम

बैंक में जेरोम ने बतौर जूनियर डेरिवेटिव ट्रेडर काम शुरू किया। उनकी टेक्नोलॉजी की समझ और ट्रेडिंग स्किल्स इतनी जबरदस्त थीं कि उन्होंने कुछ ही समय में करोड़ों की डीलिंग शुरू कर दी। उन्होंने बैंक के Delta One डिवीजन में काम किया, जो शेयर ट्रेडिंग और एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग से जुड़ा था। जेरोम को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और ट्रेडिंग सिस्टम्स की अच्छी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसी जानकारी का गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

कैसे बना करोड़ों का बैंकर दुनिया का सबसे गरीब आदमी?

जेरोम ने बैंक के इंटरनल सिस्टम की खामियों का फायदा उठाते हुए आर्बिट्राज ट्रेडिंग शुरू की। उन्होंने कंपनी के पैसे से अरबों डॉलर की ट्रेडिंग की और शुरुआत में भारी मुनाफा कमाया। एक साल में उन्होंने करीब 73 बिलियन डॉलर तक की ट्रेडिंग कर डाली और बैंक को भनक तक नहीं लगी क्योंकि वह हर गड़बड़ी को टेक्नोलॉजी से छुपा देते थे।

जब खुला सबसे बड़ा घोटाला

2008 में बैंक को शक हुआ और जांच के बाद 19 जनवरी 2008 को जेरोम का घोटाला सामने आ गया। बैंक को जेरोम की गलत ट्रेडिंग से 7.2 बिलियन डॉलर (करीब 495000 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ, और ये रकम अब कर्ज बनकर जेरोम के सिर पर चढ़ गई।

जेल और कोर्ट का फैसला

2015 में कोर्ट ने जेरोम को तीन साल की जेल की सजा सुनाई। उन्हें विश्वासघात, फर्जीवाड़ा और बिना अनुमति के कंप्यूटर का इस्तेमाल करने का दोषी माना गया। उन्होंने जेल की सजा पूरी कर ली, लेकिन उनके ऊपर आज भी 495000 करोड़ रुपये का कर्ज बना हुआ है।

आज क्या कर रहे हैं जेरोम?

जेल से छूटने के बाद जेरोम अब एक सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रहे हैं। वह छोटी-मोटी नौकरियां कर रहे हैं, लेकिन जिस कर्ज का बोझ उनके सिर पर है, उससे उनका नाम हमेशा के लिए दुनिया के सबसे गरीब व्यक्ति की लिस्ट में सबसे नीचे दर्ज हो चुका है।

कुछ लोग मानते हैं कि उन्होंने जानबूझकर नहीं किया, तो कुछ लोग मानते हैं कि लालच में आकर उन्होंने सिस्टम का फायदा उठाया। लेकिन सच्चाई यही है कि करोड़ों का बैंकर आज एक ऐसे कर्ज में डूबा है जिससे उबर पाना नामुमकिन है।

हमें क्या सीख मिलती है?

जेरोम की कहानी हमें यह सिखाती है कि तकनीकी ज्ञान और पोजीशन का गलत इस्तेमाल करने से चाहे शुरुआत में फायदा मिले, लेकिन अंत में परिणाम बहुत बड़ा नुकसान दे सकता है। यह भी सिखाता है कि गरीबी का मतलब सिर्फ जेब खाली होना नहीं है, बल्कि कर्ज में डूबना भी गरीबी की परिभाषा बन सकता है।

FAQs about Poorest person of the World

जेरोम केर्विएल कौन है?

A: जेरोम फ्रांस का एक ट्रेडर है, जिसने कभी अरबों डॉलर की ट्रेडिंग की और अब 495000 करोड़ के कर्ज में डूबा है।

जेरोम केर्विएल को दुनिया का सबसे गरीब आदमी क्यों कहा जाता है?

A: क्योंकि वह 495000 करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा है, जो दुनिया में किसी व्यक्ति का सबसे बड़ा कर्ज माना जाता है।

जेरोम केर्विएल ने कौन सी गलती की थी?

A: उन्होंने बैंक के सिस्टम की कमजोरी का फायदा उठाकर अनऑथराइज्ड ट्रेडिंग की थी।

जेरोम ने कितनी ट्रेडिंग की थी?

A: उन्होंने एक साल में करीब 73 बिलियन डॉलर तक की ट्रेडिंग की थी।

किस बैंक में जेरोम काम करता था?

A: फ्रांस के Societe Generale बैंक में।

जेरोम पर कितना नुकसान हुआ था बैंक को?

A: करीब 7.2 बिलियन डॉलर, यानी 495000 करोड़ रुपये से ज्यादा।

जेरोम को कितनी सजा हुई थी?

A: उन्हें तीन साल की जेल की सजा हुई थी।

क्या जेरोम ने जानबूझकर यह घोटाला किया था?

A: कुछ लोग कहते हैं हां, कुछ का मानना है कि सिस्टम की कमजोरियों में फंसकर ऐसा हुआ।

आज जेरोम क्या कर रहे हैं?

A: जेल से छूटने के बाद वे सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रहे हैं और छोटे-मोटे काम कर रहे हैं।

जेरोम की कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

A: लालच और सिस्टम का गलत इस्तेमाल कितना भारी पड़ सकता है और असली गरीबी सिर्फ खाली जेब नहीं, बल्कि कर्ज में डूबना भी हो सकती है।

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DMV Scam – अमेरिका से फैला खतरनाक टेक्स्ट मैसेज स्कैम, चीन से जुड़ा कनेक्शन – जानिए कैसे बचें https://chandigarhnews.net/dmv-scam/ https://chandigarhnews.net/dmv-scam/#respond Sat, 28 Jun 2025 07:23:43 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=62450 DMV Scam – अमेरिका से फैला खतरनाक टेक्स्ट मैसेज स्कैम, चीन से जुड़ा कनेक्शन – जानिए कैसे बचें DMV Scam

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DMV Scam – अमेरिका से फैला खतरनाक टेक्स्ट मैसेज स्कैम, चीन से जुड़ा कनेक्शन जानिए कैसे बचें

DMV Scam – इंटरनेट के इस दौर में अब धोखाधड़ी सिर्फ कॉल तक सीमित नहीं रही. टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए भी आपकी निजी जानकारी खतरे में डाली जा सकती है – और DMV स्कैम इसका ताजा उदाहरण है.

हाल ही में अमेरिका में एक नए तरह के साइबर फ्रॉड ने लोगों की नींद उड़ा दी है. इस स्कैम को “DMV टेक्स्ट स्कैम” कहा जा रहा है, जिसमें यूज़र्स को ऐसे टेक्स्ट मैसेज भेजे जा रहे हैं जो दिखने में सरकारी लगते हैं, लेकिन असल में ये फिशिंग हमलों का हिस्सा होते हैं. टेक्स्ट में दी गई लिंक पर क्लिक करते ही यूज़र एक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जहां उसकी क्रेडिट कार्ड डिटेल्स समेत दूसरी निजी जानकारियों की चोरी कर ली जाती है.

“DMV Scam सिर्फ अमेरिका नहीं, बल्कि भारत समेत सभी स्मार्टफोन यूज़र्स के लिए चेतावनी है – टेक्स्ट पर आंख बंद कर क्लिक करना अब भारी पड़ सकता है.”

आइए, जानते हैं DMV Scam से जुड़ी हर जरूरी जानकारी और इससे कैसे बचा जा सकता है.

क्या है DMV Scam?

DMV का मतलब होता है – Department of Motor Vehicles, यानी मोटर वाहन विभाग. इस नाम का उपयोग करके साइबर अपराधी अमेरिका के नागरिकों को एक नकली सरकारी मैसेज भेजते हैं. इस मैसेज में लिखा होता है कि उन्होंने कोई ट्रैफिक नियम तोड़ा है या उनके ड्राइविंग लाइसेंस में कुछ अपडेट जरूरी है. साथ ही एक लिंक भी दिया होता है जिस पर क्लिक करने को कहा जाता है.

असल में यह लिंक एक फिशिंग वेबसाइट पर रीडायरेक्ट करता है, जो बिल्कुल सरकारी वेबसाइट जैसी दिखती है. वहां यूज़र से उसका नाम, क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV, ओटीपी जैसी जानकारी मांगी जाती है. कुछ मामलों में मैलवेयर भी इंस्टॉल कर दिया जाता है जिससे फोन की एक्टिविटी मॉनिटर की जा सके.

स्कैम का चीन से कनेक्शन

हाल ही में आई रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में इस स्कैम की गतिविधियां जून महीने में 700% तक बढ़ गई हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि इन मैसेज का स्रोत चीन से ट्रेस किया गया है. यह भी देखा गया है कि मैसेज में अक्सर “.gov” डोमेन का उपयोग किया जाता है ताकि वह असली लगे.

एक अकेला अपराधी रोज भेज सकता है 20 लाख मैसेज!

TOI Tech की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अकेला हैकर या साइबर क्रिमिनल एक दिन में 20 लाख स्कैम मैसेज भेज सकता है. यह आंकड़ा महीने में 6 करोड़ मैसेज तक पहुंच सकता है. यानी यह स्कैम कितनी तेज़ी से फैल सकता है, इसका अंदाज़ा आप खुद लगा सकते हैं.

भारत में क्यों है ये खबर अहम?

भले ही फिलहाल यह स्कैम अमेरिका को टारगेट कर रहा है, लेकिन भारत में भी इसी तरह के टेक्स्ट स्कैम्स पहले सामने आ चुके हैं. यहां भी लोगों को बैंकिंग, ट्रैफिक चालान, PAN अपडेट, मोबाइल वेरिफिकेशन आदि के नाम पर फेक मैसेज भेजे जाते हैं जिनमें लिंक होती है.

इसीलिए यह जरूरी है कि भारत के यूज़र्स भी सतर्क रहें, क्योंकि स्कैम का पैटर्न चाहे कुछ भी हो – मंशा हमेशा एक ही रहती है: आपकी जानकारी चुराना.

DMV Scam से कैसे बचें?

DMV Scam समेत अन्य टेक्स्ट स्कैम्स से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाएं:

कभी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, खासकर तब जब मैसेज में सरकारी टोन हो और लिंक shortened या संदिग्ध लगे.

.gov या .nic.in डोमेन देखकर भ्रमित न हों. फर्जी वेबसाइट भी आज असली जैसी बनती हैं.

किसी भी वेबसाइट पर क्रेडिट कार्ड या बैंक डिटेल्स न भरें, जब तक आप 100% सुनिश्चित न हों.

फोन में कोई एप डाउनलोड न करें, जिसे किसी लिंक से सजेस्ट किया गया हो.

एंटी-वायरस और स्पैम फिल्टर ऑन रखें. कुछ मोबाइल सिक्योरिटी एप्स फिशिंग लिंक को पहचानकर ब्लॉक कर देते हैं.

संवेदनशील जानकारी SMS या कॉल पर न दें, चाहे सामने वाला खुद को सरकारी अफसर ही क्यों न बताए.

FAQs – DMV Scam को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. DMV Scam क्या सच में सरकारी संस्था से जुड़ा होता है?

Ans: नहीं. DMV नाम का उपयोग करके फर्जी मैसेज भेजे जाते हैं ताकि वह असली लगे. असली सरकारी विभाग ऐसी जानकारी SMS से नहीं भेजते.

Q2. क्या भारत में भी ऐसे स्कैम हो सकते हैं?

Ans: हां, भारत में भी इसी तरह के टेक्स्ट और कॉल स्कैम आम हैं. सिर्फ मैसेज की भाषा और विषय बदल जाता है.

Q3. अगर मैंने गलती से लिंक पर क्लिक कर दिया तो क्या करें?

Ans: तुरंत अपने फोन को एयरप्लेन मोड में डालें, बैंक को सूचना दें और एक मोबाइल सिक्योरिटी ऐप से स्कैन करें.

Q4. स्कैम मैसेज में .gov लिखा हो तो क्या वह सुरक्षित होता है?

Ans: नहीं. फर्जी वेबसाइट में भी ‘.gov’ जैसा URL इस्तेमाल किया जा सकता है. पूरी वेबसाइट का एड्रेस देखकर ही भरोसा करें.

Q5. क्या कोई एप्लिकेशन DMV Scam से बचा सकता है?

Ans: हां, कुछ मोबाइल सिक्योरिटी ऐप्स (जैसे Norton, Kaspersky, Bitdefender) फिशिंग URL को ब्लॉक करते हैं. लेकिन सतर्क रहना सबसे जरूरी उपाय है.

निष्कर्ष:

DMV Scam एक ऐसा खतरा है जो हमें सिखाता है कि डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल सावधानी भी जरूरी है. टेक्स्ट मैसेज आज सबसे आसान स्कैमिंग तरीका बन गया है, और इसकी गिरफ्त में कोई भी आ सकता है – चाहे वह अमेरिका में हो या भारत में. इसलिए आंख बंद कर किसी भी मैसेज पर भरोसा न करें, क्योंकि सतर्क नागरिक ही सुरक्षित नागरिक होता है.

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Elon Musk Networth – Where does Elon Musk get so much money from? https://chandigarhnews.net/elon-musk-networth/ https://chandigarhnews.net/elon-musk-networth/#respond Sun, 18 May 2025 12:40:53 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=61270 Elon Musk Networth – Where does Elon Musk get so much money from? Elon Musk Networth – According to the

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Elon Musk Networth – Where does Elon Musk get so much money from?

Elon Musk Networth – According to the latest figures of America’s Bloomberg Billionaire Index, Tesla Company CEO Elon Musk has added 257 billion dollars to his net worth this year and now his total net worth has become 486 billion dollars.

Elon Musk is now just 14 billion dollars behind in taking his net worth to 500 billion dollars. Just last Tuesday, his one-day net worth increased by 12 billion dollars and in the last 30 days, Elon Musk added 143 billion dollars to his net worth and reached 486 billion dollars. According to this, till now in this year, his net worth is more than double by 2024.

The CEO of Tesla cars, which are the world’s most expensive car production company, will be the first person in the world at the age of 53 whose personal net worth will be 500 billion dollars.

His property has already risen by 115% till 2025, which will increase further in the coming time. Apart from electronic vehicles, Tesla Company also sells solar batteries.

Billionaire Grown 3 Times in 2024 – 2024 में अरबपतियों की संपत्ति में तीन गुना तेजी से वृद्धि, जानें उनकी प्रतिदिन की कमाई

Spacex Company also belongs to Elon Musk, the work of this company is to supply to Antariksh station and they have a contract with NASA and it is a spaceship production company. Twitter which is known as X is also the Company of Elon Musk.

Apart from these companies, Elon Musk is also the owner of XAI, Neuralin and Boring Company.

On 11 December, 2024, Elon Musk became the first person in the world to cross the personal asset of 400 billion dollars and he is only 14 billion dollars behind in reaching 500 billion dollars.

So friends, we hope that soon Elon Musk will achieve this target as well and will become the first person in the world to have assets worth 500 billion dollars.

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iPhones Should Stop Making Phones in India – Why did American President Donald Trump Say this to Apple CEO? https://chandigarhnews.net/iphones-should-stop-making-phones-in-india/ https://chandigarhnews.net/iphones-should-stop-making-phones-in-india/#respond Sat, 17 May 2025 11:38:02 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=61249 iPhones Should Stop Making Phones in India – Why did American President Donald Trump Say this to Apple CEO? Recently

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iPhones Should Stop Making Phones in India – Why did American President Donald Trump Say this to Apple CEO?

Recently American President Donald Trump has asked the CEO of Apple company to shut down its mobile phone plants in India. By saying this he has targeted the iPhone manufacturers for planning to shift their manufacturing plants to some other country outside China.

Recently Trump has also asked Tim Cook in a discussion held in Qatar to focus on increasing the production of Apple mobile phones in America. By saying this growth of iPhone in India is going to have a major impact.

Trump recently said that he was upset with the fact that Apple is expanding its business in many places in India and I personally do not want you to do further development in India, I want you to increase the production of your iPhones in America.

Trump further said that India is capable of taking care of itself and India is the most praised country in the world. In such a situation, America faces a lot of problem in selling its products in the country with the highest population in the world.

Trump further said that in the recent talks with India, an agreement has been reached that India can reduce its tariff on American products and India wants to compromise in import tax.

This statement by Trump can have a major impact on Apple’s planning to source the supply of American iPhones from India by the end of next year 2026. And this was to reduce the manufacturing de-lending on China amid the tensions of geopolitics and tariff.

Most of the share of iPhones manufacturing in India is assembled in Foxconn Technology Group’s factory situated in South India. This electronics manufacturing unit of Tata group, which bought the local business of Wistron Corp. and runs its operations in India under the name Pegatron Corp., is a major supplier.

Sources have revealed that Foxconn and Tata are setting up new mobile manufacturing plants in South India due to which they are focusing on increasing the mobile production capacity.

From March 2-25, Apple has assembled iPhones worth $22 billion in just 12 months, which is considered to be 60% growth compared to last year’s production. Due to all these reasons, Donald Trump wants that the production of Apple iPhone mobile phones should be done in America.

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Billionaire Grown 3 Times in 2024 – 2024 में अरबपतियों की संपत्ति में तीन गुना तेजी से वृद्धि, जानें उनकी प्रतिदिन की कमाई https://chandigarhnews.net/billionaire-grown-3-times-in-2024/ https://chandigarhnews.net/billionaire-grown-3-times-in-2024/#respond Wed, 22 Jan 2025 08:10:13 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56928 Billionaire Grown 3 Times in 2024 – 2024 में अरबपतियों की संपत्ति में तीन गुना तेजी से वृद्धि, जानें उनकी

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Billionaire Grown 3 Times in 2024 – 2024 में अरबपतियों की संपत्ति में तीन गुना तेजी से वृद्धि, जानें उनकी प्रतिदिन की कमाई

Billionaire Grown 3 Times in 2024 – 2024 में अरबपतियों की संपत्ति में अभूतपूर्व वृद्धि 2024 में दुनियाभर के अरबपतियों की संपत्ति 2,000 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़कर 15,000 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई है, जो कि 2023 के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है।

ऑक्सफैम इंटरनेशनल की वैश्विक असमानता पर नवीनतम रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, अरबपतियों की संपत्ति औसतन 5.7 अरब अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन की दर से बढ़ी।

दुनिया के सबसे अमीरों की संपत्ति बढ़ने की दर रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति औसतन प्रतिदिन 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर बढ़ी। खास बात यह है कि ये लोग अगर अपनी संपत्ति का 99 प्रतिशत खो भी दें, तो भी वे अरबपति बने रहेंगे।

नए अरबपतियों की संख्या 2024 में 204 नए अरबपति बनें, और हर सप्ताह लगभग 4 नए नाम इस सूची में शामिल हुए। इस साल 41 नए अरबपति केवल एशिया से जुड़े थे। यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि अरबपतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि गरीबों के हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

आर्थिक असमानता की बढ़ती खाई ऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘ग्लोबल नॉर्थ’ के देशों के पास वैश्विक संपत्ति का 69 प्रतिशत और अरबपतियों की संपत्ति का 77 प्रतिशत है, जबकि इन देशों की वैश्विक आबादी में हिस्सेदारी सिर्फ 21 प्रतिशत है। इस असमानता पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं ने भी चिंता व्यक्त की है।

Elon Musk Networth – Where does Elon Musk get so much money from?

गरीबों की स्थिति में स्थिरता रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 6.85 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन से कम पर जीवन यापन करने वाले लोगों की संख्या में 1990 के बाद से कोई विशेष बदलाव नहीं आया है, जो असमानता की ओर इशारा करता है।

आखिरकार, अरबपतियों की संपत्ति और शक्ति में इजाफा ऑक्सफैम इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक अमिताभ बेहार ने कहा कि “हमारी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कुछ खास लोगों का कब्जा इतना बढ़ गया है, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती।” अरबपतियों की संपत्ति जमा करने की गति और उनकी ताकत अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है, और यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले दशक में कुछ लोग खरबपति बन जाएंगे।

निष्कर्ष 2024 में अरबपतियों की संपत्ति में तेज़ी से वृद्धि दर्शाती है कि आर्थिक असमानता में लगातार इजाफा हो रहा है, जबकि गरीबों की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर वित्तीय असमानता के बढ़ने और कुछ विशेष वर्गों के संपत्ति पर बढ़ते नियंत्रण का प्रमाण है।

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Trump Meme Coin – सोलाना और ट्रंप मीम कॉइन ने क्रिप्टो बाजार में मचाई धूम https://chandigarhnews.net/trump-meme-coin/ https://chandigarhnews.net/trump-meme-coin/#respond Mon, 20 Jan 2025 09:45:27 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56703 Trump Meme Coin – सोलाना और ट्रंप मीम कॉइन ने क्रिप्टो बाजार में मचाई धूम Trump Meme Coin – क्रिप्टो

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Trump Meme Coin – सोलाना और ट्रंप मीम कॉइन ने क्रिप्टो बाजार में मचाई धूम

Trump Meme Coin – क्रिप्टो बाजार में हलचल तेज हो गई है, और निवेशकों का ध्यान सोलाना (SOL) और डोनाल्ड ट्रंप के नए मीम कॉइन $TRUMP की ओर खींचा जा रहा है। जहां ट्रंप के टोकन ने लॉन्च होते ही निवेशकों को चौंकाया, वहीं सोलाना ने लगातार मजबूत प्रदर्शन से निवेशकों को बड़ा फायदा पहुंचाया है।

सोलाना (SOL) की 24 घंटे में 20% की तेजी

शनिवार को सोलाना ने क्रिप्टो बाजार में जबरदस्त तेजी दर्ज की।

शुरुआती कीमत: $220.78 (करीब ₹19,114)।

उच्चतम कीमत: $267.74 (करीब ₹23,180)।

समाप्त कीमत: $247.49 पर कारोबार।

यह उछाल 24 घंटों में 20% से अधिक का रिटर्न दर्शाता है।

पिछले 1 साल में:

सोलाना ने निवेशकों को 150% से अधिक रिटर्न दिया।

अगर किसी ने 1 लाख रुपये का निवेश किया होता, तो वह आज ₹2.50 लाख में बदल गया होता।

पिछले 5 साल में:

सोलाना ने करीब 30,000% रिटर्न दिया है।

1 लाख रुपये का निवेश अब 3 करोड़ रुपये के बराबर हो चुका होता।

डोनाल्ड ट्रंप का $TRUMP मीम कॉइन

शुक्रवार को लॉन्च हुआ $TRUMP मीम कॉइन ट्रंप की थीम “फाइट, फाइट, फाइट” से प्रेरित है।

लॉन्च कीमत: $0.18

कुछ ही घंटों में यह बढ़कर $15.13 तक पहुंच गई, यानी 7,790% की तेजी।

मार्केट कैप: तीन घंटे में 8 बिलियन डॉलर।

ट्रेडिंग वॉल्यूम: 1 बिलियन डॉलर के करीब।

$TRUMP की सफलता के आंकड़े:

एक ट्रेडर ने सिर्फ एक घंटे में 20 मिलियन डॉलर (₹166 करोड़) का मुनाफा कमाया।

इस कॉइन के 200 मिलियन यूनिट्स जारी किए गए हैं।

सोलाना और ट्रंप मीम कॉइन में फर्क:

सोलाना (SOL):

एक स्थिर और मजबूत ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट।

दीर्घकालिक निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न।

तकनीकी और इकोसिस्टम विस्तार के लिए मशहूर।

$TRUMP मीम कॉइन:

हाइप और ट्रेंड पर आधारित।

बेहद अस्थिर और जोखिम भरा।

शॉर्ट-टर्म निवेशकों के लिए मुनाफे का अवसर।

क्या क्रिप्टो बाजार में है मौका?

सोलाना जैसी स्थिर और सिद्ध क्रिप्टोकरेंसी में दीर्घकालिक निवेश सुरक्षित और लाभकारी हो सकता है।

मीम कॉइन्स जैसे $TRUMP में मुनाफा तेजी से होता है, लेकिन यह अत्यधिक जोखिमभरा है।

निवेशकों के लिए सुझाव:

जोखिम सहने की क्षमता और लंबी अवधि के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए निवेश करें।

सोलाना जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दें।

मीम कॉइन्स में शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग करते समय सतर्क रहें।

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Hindenburg closed its Shop – हिंडनबर्ग रिसर्च के बंद होने पर वकील जयअनंत देहाद्राई के बयान: साजिश और राजनीतिक खेल के आरोप https://chandigarhnews.net/hindenburg-closed-its-shop/ https://chandigarhnews.net/hindenburg-closed-its-shop/#respond Mon, 20 Jan 2025 08:30:18 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56690 Hindenburg closed its Shop – हिंडनबर्ग रिसर्च के बंद होने पर वकील जयअनंत देहाद्राई के बयान: साजिश और राजनीतिक खेल

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Hindenburg closed its Shop – हिंडनबर्ग रिसर्च के बंद होने पर वकील जयअनंत देहाद्राई के बयान: साजिश और राजनीतिक खेल के आरोप

Hindenburg Closing – हिंडनबर्ग रिसर्च के बंद होने की खबर ने वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। सीनियर वकील जयअनंत देहाद्राई ने इस मामले पर अपनी राय व्यक्त की और इसे गहरी साजिश करार दिया। उनका दावा है कि हिंडनबर्ग का बंद होना केवल एक व्यावसायिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई गोपनीय राज़ छिपे हुए हैं।

सुनियोजित साजिश और ग्लोबल एंगल”

देहाद्राई के अनुसार, हिंडनबर्ग की रिपोर्टें एक सुनियोजित साजिश थीं, जिनमें ग्लोबल और नेशनल दोनों एंगल शामिल थे।

ग्लोबल एंगल:

कंपनी अमेरिका में लिमिटेड लाइबिलिटी कंपनी (LLC) के रूप में पंजीकृत थी।

देहाद्राई ने कहा कि यह रिपोर्ट्स केवल भारतीय कंपनियों को निशाना बनाने के लिए तैयार की गई थीं।

नेशनल एंगल:

हिंडनबर्ग की रिपोर्टों ने अदाणी ग्रुप जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों को नुकसान पहुंचाने का काम किया।

रिपोर्ट के माध्यम से भारतीय कंपनियों की छवि खराब करने की कोशिश की गई।

सत्ता परिवर्तन का असर”

देहाद्राई ने हिंडनबर्ग के बंद होने की टाइमिंग को अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी से जोड़ा।

ट्रंप की संभावित जीत और उनकी टीम के सत्ता संभालने के संकेतों ने हिंडनबर्ग को बंद होने पर मजबूर कर दिया।

अमेरिकी सांसद लैंस गुडिन ने न्याय विभाग से अदाणी ग्रुप पर की गई जांच के आधार पर सवाल उठाए थे।

देहाद्राई ने आरोप लगाया कि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के साथ डीप स्टेट का प्रभाव खत्म होने लगा है।

जॉर्ज सोरोस और डीप स्टेट की भूमिका”

देहाद्राई ने दावा किया कि हिंडनबर्ग का संचालन जॉर्ज सोरोस और उनके जैसे व्यक्तियों के प्रभाव में हो रहा था।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी संस्थानों में डीप स्टेट के जरिए राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा था।

ट्रंप की टीम ने संकेत दिए हैं कि डीप स्टेट के इन तत्वों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

हिंडनबर्ग की दुकान बंद होने के बावजूद प्लानिंग जारी”

देहाद्राई ने यह भी कहा कि हिंडनबर्ग ने अपने भविष्य के लिए रास्ते खुले रखे हैं।

कंपनी ने जल्दबाजी में अपनी दुकान बंद की है।

देहाद्राई ने इसे राजनीतिक दबाव और न्यायिक प्रक्रियाओं का परिणाम बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि हिंडनबर्ग भविष्य में फिर से सक्रिय हो सकता है।

निष्कर्ष: क्या हिंडनबर्ग का बंद होना महज संयोग है?

देहाद्राई के बयान से यह स्पष्ट है कि हिंडनबर्ग रिसर्च का बंद होना सिर्फ एक व्यावसायिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई राजनीतिक और आर्थिक पहलू छिपे हैं।

अदाणी ग्रुप पर हमले और अमेरिकी सत्ता परिवर्तन को जोड़कर यह मामला और भी जटिल हो गया है।

भारत और अन्य देशों को इस तरह की रणनीतियों से सतर्क रहने की जरूरत है, जहां आर्थिक और राजनीतिक हित प्रभावित हो सकते हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि हिंडनबर्ग का बंद होना वैश्विक राजनीति और व्यापारिक जगत पर क्या प्रभाव डालता है।

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