Health – Chandigarh News https://chandigarhnews.net Latest Chandigarh News Tue, 20 Jan 2026 07:48:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://chandigarhnews.net/wp-content/uploads/2025/04/chandigarh-news-logo-1.png Health – Chandigarh News https://chandigarhnews.net 32 32 7000 Steps Walking – रोजाना सिर्फ 7000 कदम चलिए, कैंसर और डिप्रेशन का खतरा होगा कम – नई रिसर्च में खुलासा https://chandigarhnews.net/7000-steps-walking/ https://chandigarhnews.net/7000-steps-walking/#respond Mon, 28 Jul 2025 08:56:27 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=63426 7000 Steps Walking – रोजाना सिर्फ 7000 कदम चलिए, कैंसर और डिप्रेशन का खतरा होगा कम – नई रिसर्च में

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7000 Steps Walking – रोजाना सिर्फ 7000 कदम चलिए, कैंसर और डिप्रेशन का खतरा होगा कम नई रिसर्च में खुलासा

अगर आप हेल्दी रहना चाहते हैं और जिम जाने का वक्त नहीं मिलता, तो सिर्फ रोजाना पैदल चलकर भी आप गंभीर बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं। एक नई रिसर्च में सामने आया है कि सिर्फ 7000 कदम रोज चलने से कैंसर, डिप्रेशन, डायबिटीज और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

क्यों जरूरी है वॉक करना?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम, ट्रैफिक और मोबाइल में इतने उलझ चुके हैं कि अपने स्वास्थ्य पर ध्यान ही नहीं दे पाते। लगातार बदलता खान-पान और लाइफस्टाइल सेहत पर गहरा असर डालता है। ऐसे में अगर आप रोजाना सिर्फ कुछ कदम चलने की आदत डाल लें, तो यह आपकी सेहत में बड़ा बदलाव ला सकती है।

क्या कहती है नई रिसर्च?

‘द लैंसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल’ में प्रकाशित इस नई स्टडी में 160,000 से ज्यादा वयस्कों पर 57 अलग-अलग शोधों का विश्लेषण किया गया।

इसमें पाया गया कि:

  • रोजाना 7,000 कदम चलने वालों में डिमेंशिया का खतरा 38% तक कम हो जाता है।
  • कैंसर का खतरा 6% तक कम होता है।
  • दिल की बीमारी का खतरा 25% तक घट जाता है।

यह शोध सिडनी यूनिवर्सिटी की पब्लिक हेल्थ प्रोफेसर मेलोडी डिंग के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने कहा कि रोजाना 7,000 कदम चलने की आदत डालने से न सिर्फ शरीर एक्टिव रहता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

कम कदम भी देंगे फायदा

इस रिसर्च में यह भी बताया गया कि जो लोग बिल्कुल भी वॉक नहीं करते, अगर वे सिर्फ 2,000 कदम रोज चलना शुरू कर दें, तब भी उनकी सेहत में सुधार दिखने लगता है। यानी, थोड़ा चलना भी न चलने से बेहतर है।

7,000 कदम क्यों हैं खास?

  • यह एक ऐसा लक्ष्य है जिसे बिना अतिरिक्त समय निकाले भी पूरा किया जा सकता है।
  • लिफ्ट की जगह सीढ़ियां लेना, पार्क में वॉक करना या पास की दुकान तक पैदल जाना – ऐसे छोटे बदलाव से यह लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।
  • 7,000 कदम का मतलब लगभग 5-6 किलोमीटर पैदल चलना होता है, जो वजन घटाने और फिट रहने के लिए भी उपयोगी है।

अगर आप पहले से 7,000+ कदम चलते हैं, तो क्या करें?

प्रोफेसर मेलोडी डिंग कहती हैं कि अगर आप पहले से 7,000 कदम से ज्यादा चलते हैं, जैसे 8,000 या 10,000 कदम, तो इसी रूटीन को बनाए रखें। इससे आपके शरीर को और भी ज्यादा फायदा होगा और फिटनेस लेवल बेहतर रहेगा।

क्यों जरूरी है कदम गिनना?

रोजाना कदम गिनने से:

  • आपको एक्टिव रहने की प्रेरणा मिलती है।
  • दिनभर की फिजिकल एक्टिविटी का पता चलता है।
  • खुद पर नजर रखकर धीरे-धीरे लक्ष्य बढ़ा सकते हैं।

आप स्मार्टफोन में स्टेप ट्रैकर या स्मार्टवॉच का इस्तेमाल करके भी आसानी से कदम गिन सकते हैं।

ऐसे बढ़ाएं रोजाना कदम:

  • लिफ्ट की जगह सीढ़ियां लें।
  • फोन पर बात करते समय टहलें।
  • ऑफिस में भी ब्रेक लेकर वॉक करें।
  • पास की दूरी पैदल तय करें।
  • शाम को परिवार या दोस्तों के साथ वॉक पर जाएं।

निष्कर्ष

सेहतमंद रहने के लिए आपको महंगे जिम में मेंबरशिप लेने या भारी-भरकम वर्कआउट करने की जरूरत नहीं है। रोजाना सिर्फ 7,000 कदम चलकर भी आप कैंसर, डिप्रेशन, डिमेंशिया और दिल की बीमारियों जैसी गंभीर समस्याओं के खतरे को कम कर सकते हैं।

आज से ही छोटे-छोटे बदलाव शुरू करें, पैदल चलने की आदत डालें और खुद को स्वस्थ और खुशहाल बनाएं।

अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी तो इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करें ताकि वे भी वॉकिंग की इस आसान आदत से अपनी जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकें।

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Things to Check before Buying Health Insurance India – Health Insurance लेते वक्त ज़रा सी गलती पड़ सकती है भारी – जानिए क्या जरूर जांचें https://chandigarhnews.net/buying-health-insurance-india/ https://chandigarhnews.net/buying-health-insurance-india/#respond Sat, 21 Jun 2025 10:18:44 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=62304 Things to Check before Buying Health Insurance India – Health Insurance लेते वक्त ज़रा सी गलती पड़ सकती है भारी

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Things to Check before Buying Health Insurance India – Health Insurance लेते वक्त ज़रा सी गलती पड़ सकती है भारी जानिए क्या जरूर जांचें

आजकल इलाज सस्ता नहीं, लेकिन एक छोटी सी समझदारी से अस्पताल का बड़ा बिल बचाया जा सकता है – बस सही Health Insurance चुनना आना चाहिए।

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना आसान है, लेकिन सही प्लान चुनना समझदारी है।”

महंगे होते इलाज, बढ़ते मेडिकल बिल्स और स्वास्थ्य जोखिमों के बीच हेल्थ इंश्योरेंस अब एक विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुका है। लेकिन कई लोग जल्दबाज़ी या कम जानकारी में गलत पॉलिसी चुन लेते हैं और फिर क्लेम रिजेक्ट होने या इलाज में दिक्कत जैसी समस्याएं उठानी पड़ती हैं।

इसलिए अगर आप भी हेल्थ इंश्योरेंस लेने जा रहे हैं, तो इन 6 अहम बातों का ध्यान जरूर रखें:

Best Nursing Coaching

  1. कौन-कौन सी बीमारियां होंगी कवर?

हर हेल्थ पॉलिसी में अलग-अलग बीमारियों और मेडिकल कंडीशन्स का कवरेज होता है। आपको यह साफ तौर पर जांचना चाहिए कि:

  • क्या गंभीर बीमारियां (Critical Illnesses) शामिल हैं?
  • क्या आपके परिवार में पहले से चल रही बीमारियों को शामिल किया गया है?
  • हॉस्पिटलाइजेशन, डे केयर, एंबुलेंस चार्ज आदि कितनी हद तक कवर हैं?

टिप: ज्यादा से ज्यादा कवर देने वाली पॉलिसी को प्राथमिकता दें।

  1. नो-क्लेम बोनस (NCB) कितना मिलेगा?

अगर आपने किसी साल में क्लेम नहीं किया, तो बीमा कंपनी अगले साल आपके Sum Insured में बोनस जोड़ती है – इसे ही No Claim Bonus कहते हैं।

उदाहरण: अगर आपका Sum Insured ₹5 लाख है और NCB 50% है, तो अगले साल ये ₹7.5 लाख हो सकता है।

जरूरी:

पूछें कि NCB कैसे बढ़ेगा – % या फ्लैट रेट में

यह Maximum कितने साल तक मिलेगा?

  1. वेटिंग पीरियड क्या है?

Pre-existing diseases जैसे डायबिटीज, BP, थायरॉइड, आदि के लिए पॉलिसी लेते ही कवरेज नहीं मिलता। इसके लिए एक तय वेटिंग पीरियड होता है – आमतौर पर 2 से 4 साल।

चेक करें:

पॉलिसी में कौन-कौन सी बीमारियां वेटिंग पीरियड में हैं?

कितने समय बाद इनका कवरेज शुरू होगा?

  1. पॉलिसी में क्या-क्या नहीं कवर होता?

हर पॉलिसी में कुछ Exclusions होते हैं – यानी वो चीजें जो कवरेज में नहीं आतीं।

जैसे:

  • कॉस्मेटिक सर्जरी
  • मेडिकल टूरिज्म
  • नॉन-ऑलोपैथिक इलाज
  • HIV/AIDS
  • मानसिक रोग (कुछ मामलों में)

अडवाइस: इन बातों को बारीकी से पढ़ें ताकि बाद में क्लेम रिजेक्ट होने पर आपको झटका न लगे।

  1. क्लेम सेटलमेंट रेशो (CSR) कैसा है?

CSR यानी Claim Settlement Ratio बताता है कि इंश्योरेंस कंपनी ने कुल कितने क्लेम में से कितने सफलतापूर्वक निपटाए।

  • Ex: CSR 97% का मतलब – 100 में से 97 क्लेम पास किए गए।
  • हमेशा इन कंपनियों को चुनें:
  • जिनका CSR 90% से ऊपर हो
  • जो तेज और hassle-free प्रोसेस देती हों
  • जिनकी customer service भरोसेमंद हो
  1. आपके आसपास कौन-कौन से Partner Hospital हैं?

Cashless Hospitalization तभी मुमकिन है जब आपके नजदीक का हॉस्पिटल उस इंश्योरेंस कंपनी से टाईअप में हो।

जांचें:

क्या आपके शहर/इलाके का अच्छा अस्पताल शामिल है?

24×7 इमरजेंसी फैसिलिटी है या नहीं?

क्या आपको हायर क्लास रूम/ICU में कवरेज मिलेगा?

Bonus Tips:

  • Co-pay clause देखें – आपको कितना खर्च खुद उठाना होगा
  • Room Rent Limit कितना है – इससे बिल क्लेम करने में फर्क पड़ता है
  • OPD और Day-care Coverage है या नहीं?

क्या परिवार के लिए Floater Plan लेना ज्यादा फायदेमंद रहेगा?

FAQs: हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े 10 जरूरी सवाल

Q1. हेल्थ इंश्योरेंस की मिनिमम उम्र क्या होती है?

A: 18 साल, लेकिन बच्चों के लिए 91 दिन से पॉलिसी शुरू की जा सकती है।

Q2. क्या सिंगल पॉलिसी पूरे परिवार के लिए ले सकते हैं?

A: हां, Family Floater Plan के जरिए पूरे परिवार को कवर किया जा सकता है।

Q3. क्या हेल्थ इंश्योरेंस टैक्स में छूट देता है?

A: हां, धारा 80D के तहत ₹25,000 से ₹1 लाख तक की छूट मिलती है।

Q4. हेल्थ चेकअप का खर्च भी कवर होता है?

A: कई पॉलिसी में हर 2-3 साल बाद फ्री हेल्थ चेकअप का विकल्प होता है।

Q5. क्लेम प्रोसेस में कितना समय लगता है?

A: सामान्यत: 7–15 दिन, लेकिन कुछ में 24-48 घंटे में कैशलेस क्लेम हो जाता है।

Q6. क्या सभी बीमारियां तुरंत कवर होती हैं?

A: नहीं, कुछ के लिए वेटिंग पीरियड होता है।

Q7. क्या कंपनी कभी क्लेम रिजेक्ट कर सकती है?

A: हां, अगर बीमा लेते समय झूठी जानकारी दी हो या एक्सक्लूजन की स्थिति हो।

Q8. क्या हेल्थ इंश्योरेंस प्लान बदल सकते हैं?

A: हां, आप पोर्टिंग करके कंपनी या प्लान बदल सकते हैं।

Q9. क्या हेल्थ इंश्योरेंस में प्रीमियम सालाना देना होता है?

A: हां, लेकिन कुछ कंपनियां मंथली या क्वार्टरली विकल्प भी देती हैं।

Q10. क्या सरकारी हॉस्पिटल में भी क्लेम मिल सकता है?

A: नहीं, अधिकतर कैशलेस सुविधा प्राइवेट हॉस्पिटल्स में ही मिलती है।

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Cough Cold Remedies in Hindi – बदलते मौसम में खांसी-जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये 3 आसान उपाय https://chandigarhnews.net/cough-cold-remedies-in-hindi/ https://chandigarhnews.net/cough-cold-remedies-in-hindi/#respond Mon, 24 Feb 2025 13:22:52 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=57968 Cough Cold Remedies in Hindi – बदलते मौसम में खांसी-जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये 3 आसान उपाय Cough

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Cough Cold Remedies in Hindi – बदलते मौसम में खांसी-जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये 3 आसान उपाय

Cough Cold Remedies in Hindi – मौसम बदल रहा है—सुबह-शाम हल्की ठंडक और दोपहर में गर्मी महसूस हो रही है। ऐसे मौसम में हमारी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे खांसी-जुकाम, बुखार और एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन कुछ आसान उपाय अपनाकर आप इन समस्याओं से बच सकते हैं।

  1. योग अपनाएं, रोग भगाएं

योग और प्राणायाम करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका और कपालभाति करने से सांस की नली साफ रहती है और जुकाम की समस्या नहीं होती।

रोज 15-20 मिनट योग करने से गले में खराश, कफ और एलर्जी से बचाव होता है।

  1. गुनगुना पानी पिएं सबसे आसान उपाय

बदलते मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है।

दिनभर 7-8 गिलास पानी पिएं, खासतौर पर गुनगुना पानी पीना फायदेमंद रहेगा।

गुनगुना पानी पाचन को मजबूत बनाता है और टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे सर्दी-जुकाम और वायरल इंफेक्शन से बचाव होता है।

  1. हर्बल चाय से इम्यूनिटी बढ़ाएं

बदलते मौसम में अदरक, तुलसी, दालचीनी और मुलेठी से बनी हर्बल चाय पीने से गले की खराश और सर्दी से बचाव होता है।

हर्बल चाय एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है।

दिन में कम से कम एक बार हर्बल चाय जरूर पिएं, खासकर सुबह के समय।

4. बच्चों और बुजुर्गों का रखें खास ध्यान

बच्चों और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, इसलिए उन्हें हल्का और पौष्टिक भोजन देना चाहिए।

हरी सब्जियां, फलों का जूस, सूप और ड्राई फ्रूट्स उनके लिए फायदेमंद होते हैं।

ठंडी चीजें और तली-भुनी चीजों से परहेज करें, क्योंकि ये सर्दी-जुकाम को बढ़ा सकती हैं।

5. छोटी सावधानियां, बड़ी राहत

अगर आपको हल्का बुखार, गले में खराश या बदन दर्द महसूस हो, तो तुरंत घरेलू उपाय अपनाएं या डॉक्टर से सलाह लें।

भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें और हाथ धोने की आदत बनाए रखें।

पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस से बचें, ताकि शरीर की इम्यूनिटी मजबूत बनी रहे।

निष्कर्ष

बदलते मौसम में सावधानी रखना जरूरी है। योग, गुनगुना पानी और हर्बल चाय जैसे आसान उपाय अपनाकर स्वस्थ रह सकते हैं और बीमारियों से बच सकते हैं। इन हेल्दी आदतों को अपनाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।

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Summer Health Tips in Hindi – गर्मी में सेहत बनी रहेगी दुरुस्त, बस अपनाएं ये जरूरी हेल्थ टिप्स https://chandigarhnews.net/summer-health-tips-in-hindi/ https://chandigarhnews.net/summer-health-tips-in-hindi/#respond Mon, 24 Feb 2025 13:19:54 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=57971 Summer Health Tips in Hindi – गर्मी में सेहत बनी रहेगी दुरुस्त, बस अपनाएं ये जरूरी हेल्थ टिप्स Summer Health

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Summer Health Tips in Hindi – गर्मी में सेहत बनी रहेगी दुरुस्त, बस अपनाएं ये जरूरी हेल्थ टिप्स

Summer Health Tips in Hindi – मौसम बदलने के साथ हमारी सेहत पर भी असर पड़ता है। सर्दियों के बाद अब गर्मी का मौसम दस्तक देने वाला है, और इस दौरान बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। गर्मियों में बढ़ता तापमान डिहाइड्रेशन, थकान, अपच और लू लगने जैसी समस्याओं को जन्म देता है। ऐसे में अगर आप कुछ सावधानियां अपनाएं, तो अपनी सेहत को बेहतर बनाए रख सकते हैं।

  1. फलों और हरी सब्जियों का करें सेवन

गर्मी के मौसम में तरबूज, खीरा, खरबूजा, संतरा और पपीता जैसे फलों का सेवन करें।

ये फलों में अधिक मात्रा में पानी और पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को ठंडक देते हैं।

हरी सब्जियां जैसे पालक, लौकी और टमाटर शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करती हैं।

  1. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

गर्मी में डिहाइड्रेशन की समस्या सबसे ज्यादा होती है, इसलिए दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।

ज्यादा पसीना निकलने से शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी हो सकती है, जिससे कमजोरी और चक्कर आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

नारियल पानी, नींबू पानी और फलों के रस का सेवन करें।

  1. हल्का और संतुलित भोजन लें

गर्मी में पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन करें।

तला-भुना, मसालेदार और ज्यादा तेल वाला खाना खाने से एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है।

अपने भोजन में दही, छाछ और सलाद को जरूर शामिल करें।

  1. कैफीन और कोल्ड ड्रिंक्स से करें परहेज

ज्यादा कैफीन (चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स) लेने से डिहाइड्रेशन और गैस्ट्रिक प्रॉब्लम हो सकती है।

कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस में ज्यादा शुगर और कैफीन होता है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक है।

इसकी जगह गुड़ का शरबत, सत्तू, बेल का शरबत और नारियल पानी पिएं।

  1. बाहर जाने से पहले रखें सावधानी

दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें, क्योंकि इस दौरान धूप सबसे तेज होती है।

बाहर निकलते समय छाता, टोपी और सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।

घर से निकलने से पहले पानी या छाछ जरूर पिएं, ताकि लू से बचा जा सके।

  1. ठंडे पानी से न नहाएं

बहुत ज्यादा गर्मी में ठंडे पानी से तुरंत न नहाएं, क्योंकि इससे शरीर के टेंपरेचर में अचानक गिरावट आ सकती है।

गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी से स्नान करें।

छोटे-छोटे बदलाव, बड़ी राहत!

अगर आप गर्मी के इस मौसम में ये आसान उपाय अपनाते हैं, तो बीमारियों से बचे रह सकते हैं और पूरे सीजन में ऊर्जावान और फिट महसूस कर सकते हैं।

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5 Deadly Diseases – तेजी से मौत की नींद सुला देती हैं ये खतरनाक बीमारियां: जानिए लक्षण और बचाव के तरीके https://chandigarhnews.net/deadly-diseases/ https://chandigarhnews.net/deadly-diseases/#respond Mon, 27 Jan 2025 04:15:45 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=57301 5 Deadly Diseases – तेजी से मौत की नींद सुला देती हैं ये खतरनाक बीमारियां: जानिए लक्षण और बचाव के

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5 Deadly Diseases – तेजी से मौत की नींद सुला देती हैं ये खतरनाक बीमारियां: जानिए लक्षण और बचाव के तरीके

5 Deadly Diseases – आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और खानपान की वजह से कई खतरनाक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें से कुछ बीमारियां इतनी घातक होती हैं कि मरीज को इलाज का मौका तक नहीं मिलता।

अगर समय रहते इन बीमारियों के लक्षणों को पहचान लिया जाए तो जान बचाई जा सकती है। आइए जानते हैं ऐसी ही हाई-रिस्क बीमारियों के बारे में, जो तेज़ी से जानलेवा हो सकती हैं।

कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) 

क्या है:

कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल अचानक काम करना बंद कर देता है। यह स्थिति तब होती है, जब दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिलते।

लक्षण:

अचानक बेहोशी

सीने में दर्द

सांस लेने में परेशानी

दिल की धड़कन का अनियमित होना

बचाव:

हेल्दी डाइट लें और रेगुलर एक्सरसाइज करें।

समय-समय पर हार्ट चेकअप करवाएं।

अगर किसी को कार्डियक अरेस्ट हो तो तुरंत CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दें और डॉक्टर से संपर्क करें।

स्ट्रोक (Stroke) 

क्या है:

स्ट्रोक तब होता है, जब ब्रेन को ब्लड सप्लाई अचानक बंद हो जाती है। इससे ब्रेन की कोशिकाएं मरने लगती हैं। अगर इलाज समय पर न हो तो मरीज की मौत हो सकती है।

लक्षण:

चेहरे, हाथ या पैर का अचानक सुन्न होना या कमजोर पड़ना

बोलने में दिक्कत

अचानक चक्कर आना या संतुलन खोना

एक आंख या दोनों आंखों से धुंधला दिखना

बचाव:

ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें।

धूम्रपान और शराब का सेवन न करें।

हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

मेनिन्जाइटिस (Meningitis) 

क्या है:

मेनिन्जाइटिस एक बैक्टीरियल या वायरल बीमारी है, जो दिमाग और रीढ़ की हड्डी के आसपास की झिल्लियों (मेनिंजेस) को प्रभावित करती है।

लक्षण:

तेज बुखार

गर्दन में अकड़न

उल्टी और मिचली

चक्कर आना

बेहोशी

बचाव:

मेनिन्जाइटिस वैक्सीन लगवाएं।

संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें।

अगर लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सेप्टिसीमिया (Septicemia)

 क्या है:

सेप्टिसीमिया खून में होने वाला गंभीर संक्रमण है, जो शरीर के बाकी अंगों को तेजी से प्रभावित करता है। यह बैक्टीरिया, वायरस या फंगल इंफेक्शन के कारण होता है।

लक्षण:

तेज बुखार और ठंड लगना

त्वचा का रंग फीका पड़ना

सांस लेने में कठिनाई

कमजोरी और भ्रम की स्थिति

बचाव:

चोटों को साफ और संक्रमण-मुक्त रखें।

इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाएं।

किसी भी संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

रेबीज (Rabies) 

क्या है:

रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने से फैलती है। यह दिमाग और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है और इलाज न होने पर जानलेवा साबित होती है।

लक्षण:

बुखार और सिरदर्द

मांसपेशियों में ऐंठन

पानी या हवा से डर लगना (हाइड्रोफोबिया)

मानसिक भ्रम

बचाव:

पालतू जानवरों को रेबीज वैक्सीन लगवाएं।

जंगली जानवरों से दूरी बनाएं।

जानवर के काटने के तुरंत बाद डॉक्टर से संपर्क करें और रेबीज वैक्सीन लगवाएं।

सावधान रहें और सतर्क रहें

इन बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी है कि आप अपनी सेहत का ध्यान रखें, समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाएं और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें।

सही समय पर इलाज और सावधानियां जान बचा सकती हैं। अगर आपको इनमें से किसी भी बीमारी के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सतर्कता ही सुरक्षा है।

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Constipation Treatment in Hindi – क्या आप भी हैं कब्ज से परेशान? जानें कारण और बचाव के आसान उपाय https://chandigarhnews.net/constipation-treatment-in-hindi/ https://chandigarhnews.net/constipation-treatment-in-hindi/#respond Sun, 26 Jan 2025 03:12:53 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=57300 Constipation Treatment in Hindi – क्या आप भी हैं कब्ज से परेशान? जानें कारण और बचाव के आसान उपाय Constipation

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Constipation Treatment in Hindi – क्या आप भी हैं कब्ज से परेशान? जानें कारण और बचाव के आसान उपाय

Constipation Treatment in Hindi – कब्ज, जिसे कॉन्स्टिपेशन भी कहा जाता है, एक आम समस्या है जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। यह समस्या सिर्फ असुविधाजनक नहीं है, बल्कि अगर लंबे समय तक बनी रहे तो डाइजेशन सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

कब्ज के कारण कई बार बवासीर, पेट दर्द, और किडनी की समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए, समय रहते इसका इलाज और रोकथाम करना बेहद जरूरी है।

आइए, जानते हैं कब्ज के कारण, लक्षण, और इसे रोकने के लिए हेल्थ एक्सपर्ट्स के सुझाव।

कब्ज के प्रमुख कारण

डॉ. धीरज कुमार के अनुसार, कब्ज के पीछे कई स्वास्थ्य समस्याएं और लाइफस्टाइल फैक्टर्स जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

डायबिटीज:

डायबिटीज के कारण मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है, जिससे पाचन धीमा हो जाता है।

हाइपोथायरायडिज्म:

थायरॉयड हार्मोन की कमी मेटाबॉलिज्म को स्लो कर देती है, जिससे कब्ज की समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था:

गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव और बढ़ते भ्रूण के कारण आंतों पर दबाव पड़ता है, जिससे कब्ज हो सकता है।

कोलोरेक्टल कैंसर:

आंतों में कैंसर होने पर रुकावट के कारण कब्ज की समस्या होती है।

आंतों में रुकावट:

आंतों में रुकावट के कारण मल त्यागने में कठिनाई हो सकती है।

कब्ज के लक्षण

मल त्यागने में कठिनाई।

पेट भारी या फूला हुआ महसूस होना।

मल टाइट और सूखा होना।

बार-बार बाथरूम जाने की जरूरत महसूस होना।

मल त्याग के दौरान दर्द या खून आना।

कब्ज से बचाव के आसान उपाय

कब्ज को रोकने के लिए अपने डेली रूटीन और खानपान में कुछ बदलाव करें। यहां हेल्थ एक्सपर्ट्स के बताए हुए टिप्स दिए गए हैं:

फाइबर से भरपूर डाइट लें

हर दिन 20 से 35 ग्राम फाइबर का सेवन करें।

फाइबर युक्त फूड्स जैसे सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दलिया, और चोकर वाले अनाज को अपनी डाइट में शामिल करें।

पर्याप्त पानी पिएं

दिन में 7 से 8 गिलास पानी जरूर पिएं।

हाइड्रेशन से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है।

नियमित एक्सरसाइज करें

हर दिन कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि करें।

चलना, दौड़ना, या योग करना पाचन को सुधारने में मदद करता है।

तनाव से बचें

तनाव और चिंता भी कब्ज का कारण बन सकते हैं।

मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की तकनीक, और पर्याप्त नींद लेकर तनाव से दूर रहें।

प्रोबायोटिक्स का सेवन करें

दही, केफिर, और अन्य प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थ खाने से पाचन तंत्र में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बना रहता है।

कैफीन और शराब से बचें

कैफीन और शराब का अधिक सेवन शरीर को डिहाइड्रेट कर सकता है, जिससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।

क्या न करें

मल त्यागने की इच्छा को नजरअंदाज न करें।

जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से बचें।

जरूरत से ज्यादा पेनकिलर का इस्तेमाल न करें, क्योंकि यह कब्ज का कारण बन सकते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर कब्ज लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। इन स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लें:

जब कब्ज के साथ खून आए।

पेट में तेज दर्द हो।

वजन अचानक कम हो जाए।

कब्ज कई हफ्तों तक बनी रहे।

निष्कर्ष

कब्ज एक आम समस्या है, लेकिन सही डाइट, एक्सरसाइज, और लाइफस्टाइल में बदलाव से इसे रोका जा सकता है। अगर आप नियमित रूप से फाइबर युक्त आहार लेते हैं, पर्याप्त पानी पीते हैं, और एक्टिव रहते हैं, तो यह समस्या आपको परेशान नहीं करेगी। फिर भी, अगर समस्या गंभीर हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है। अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।

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Aids Remedies – जब सुबह ये लक्षण दिखें तो समझ जाएं हो गया है एड्स, तुरंत करें ये काम https://chandigarhnews.net/aids-remedies/ https://chandigarhnews.net/aids-remedies/#respond Sat, 25 Jan 2025 08:10:43 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=57208 Aids Remedies – जब सुबह ये लक्षण दिखें तो समझ जाएं हो गया है एड्स, तुरंत करें ये काम Aids

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Aids Remedies – जब सुबह ये लक्षण दिखें तो समझ जाएं हो गया है एड्स, तुरंत करें ये काम

Aids Remedies – एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम (AIDS), जिसे आमतौर पर एड्स के नाम से जाना जाता है, एक गंभीर बीमारी है, जो ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) के कारण होती है।

यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर कर देती है, जिससे छोटी-छोटी बीमारियां भी जानलेवा साबित हो सकती हैं। अगर सही समय पर इसके लक्षण पहचान लिए जाएं और इलाज शुरू कर दिया जाए, तो इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

आइए जानते हैं, सुबह-सुबह दिखने वाले वे लक्षण, जो एड्स के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

एड्स होने पर सुबह दिखने वाले लक्षण

लगातार बुखार और थकान महसूस होना

अगर आपको बार-बार बुखार आता है या सुबह उठते ही तेज बुखार महसूस होता है, तो यह HIV संक्रमण का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, हल्का काम करने पर भी थकान महसूस होना और बिना किसी वजह के मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन का एहसास होना इस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।

ज्वॉइंट्स में दर्द और सूजन

सुबह उठने पर घुटने, कंधे या अन्य जोड़ों में दर्द और सूजन महसूस होना भी एड्स के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

गला सूखना और सिरदर्द

अगर पर्याप्त पानी पीने के बावजूद सुबह गला सूखा रहता है या बार-बार गले में खराश होती है, तो यह भी HIV संक्रमण का संकेत हो सकता है। साथ ही, अगर रोजाना सुबह हल्का या तेज सिरदर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

अचानक वजन घटने लगना

डाइट या एक्सरसाइज में किसी बदलाव के बिना वजन तेजी से घटने लगे, तो यह एड्स का संकेत हो सकता है। इसके साथ ही, सुबह-सुबह कमजोरी महसूस होना इस बीमारी का सामान्य लक्षण है।

स्किन से जुड़ी समस्याएं

एड्स के शुरुआती चरण में त्वचा पर लाल या पीले रैशेज नजर आ सकते हैं। खुजली या त्वचा की जलन जैसी समस्याएं सुबह ज्यादा महसूस हो सकती हैं।

लिम्फ नोड्स में सूजन और गले में दर्द

लिम्फ नोड्स में सूजन HIV संक्रमण का एक सामान्य लक्षण है। इसके साथ ही, मुंह और गले में दर्द महसूस होना और सुबह इन समस्याओं का बढ़ना एड्स के लक्षण हो सकते हैं।

क्या करें अगर ये लक्षण नजर आएं?

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें

अगर ऊपर दिए गए लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें।

एचआईवी टेस्ट कराएं

एचआईवी संक्रमण की पहचान के लिए तुरंत HIV टेस्ट करवाएं। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो समय रहते इलाज शुरू करें।

इलाज के साथ हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं

डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन करें।

अपनी डाइट में पोषण युक्त चीजें शामिल करें।

रोजाना हल्की एक्सरसाइज करें।

धूम्रपान और अल्कोहल से बचें।

संक्रमण से बचने के उपाय अपनाएं

असुरक्षित यौन संबंधों से बचें।

रक्त चढ़ाते समय हमेशा HIV टेस्टेड ब्लड का ही उपयोग करें।

किसी और की सुई या ब्लेड का इस्तेमाल न करें।

एड्स के प्रति जागरूक रहें

एड्स एक गंभीर बीमारी है, लेकिन सही समय पर इसके लक्षण पहचानकर और इलाज शुरू करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और अगर सुबह-सुबह शरीर में असामान्य बदलाव महसूस हों, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। समय पर कदम उठाने से इस बीमारी से बचाव और बेहतर जीवन संभव है।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी समस्या के लिए हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

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5 Tips to Reduce Joint Pain in winter – सर्दियों में बढ़ जाती है जोड़ों में दर्द की समस्या? घर बैठे फॉलो करें ये उपाय https://chandigarhnews.net/tips-to-reduce-joint-pain-in-winter/ https://chandigarhnews.net/tips-to-reduce-joint-pain-in-winter/#respond Wed, 22 Jan 2025 12:13:23 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56948 5 Tips to Reduce Joint Pain in winter – सर्दियों में बढ़ जाती है जोड़ों में दर्द की समस्या? घर

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5 Tips to Reduce Joint Pain in winter – सर्दियों में बढ़ जाती है जोड़ों में दर्द की समस्या? घर बैठे फॉलो करें ये उपाय

5 Tips to Reduce Joint Pain in Winter – सर्दियों में ठंड का असर शरीर पर खासतौर से जोड़ों पर पड़ता है, जिससे दर्द और अकड़न की समस्या बढ़ सकती है। सर्दी के मौसम में मांसपेशियों में खिंचाव होता है, जो जोड़ों में सूजन और दर्द का कारण बनता है। यदि आप सर्दियों में जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, तो यहां कुछ घरेलू उपाय दिए जा रहे हैं जो आपके दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं:

सरसों के तेल की मालिश:

सरसों का तेल जोड़ों में गर्माहट पैदा करता है और दर्द को कम करता है। इसे थोड़ा गर्म करके जोड़ों पर हल्की मालिश करें। आप इसमें लहसुन को भी पका सकते हैं, क्योंकि लहसुन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद करते हैं।

सिकाई करें:

जोड़ों के दर्द में आराम के लिए गर्म पानी की बोतल का इस्तेमाल करें। सिकाई करने से मांसपेशियों में राहत मिलती है और रक्त संचार में सुधार होता है, जिससे दर्द में कमी आ सकती है। इसे दर्द वाले स्थान पर कुछ मिनटों तक रखें।

गर्म कपड़े पहनें:

सर्दियों में अपने शरीर को गर्म रखने के लिए गर्म कपड़े पहनें। खासकर, हाथ, पैर और जोड़ों को कवर करके रखें ताकि आपको ज्यादा ठंड का सामना न करना पड़े और जोड़ों को गर्माहट मिल सके।

धूप में बैठें:

विटामिन D के लिए धूप में बैठना फायदेमंद हो सकता है। सर्दियों में जब सूरज हल्का हो, तो एक घंटे के लिए धूप में बैठने की कोशिश करें। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करता है।

इन उपायों को अपनाकर आप सर्दियों में जोड़ों के दर्द से निजात पा सकते हैं और राहत महसूस कर सकते हैं।

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Dry Lips Care – फटे होंठ से हैं परेशान? रात में सोने से पहले करें यह उपाय, नहीं पड़ेगी लिप बाम की जरूरत https://chandigarhnews.net/dry-lips-care/ https://chandigarhnews.net/dry-lips-care/#respond Wed, 22 Jan 2025 11:54:34 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56949 Dry Lips Care – फटे होंठ से हैं परेशान? रात में सोने से पहले करें यह उपाय, नहीं पड़ेगी लिप

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Dry Lips Care – फटे होंठ से हैं परेशान? रात में सोने से पहले करें यह उपाय, नहीं पड़ेगी लिप बाम की जरूरत

Dry Lips Care – सर्दियों में ठंडी हवाओं के कारण होंठों का सूखना और फटना एक आम समस्या बन जाती है। लिप बाम लगाने के बावजूद भी कई बार यह समस्या बनी रहती है। इसके लिए आप कुछ घरेलू उपाय अपना सकते हैं जो आपके होंठों को नर्म और सॉफ्ट बनाए रखेंगे।

शहद:

शहद एक बेहतरीन मॉइस्चराइजिंग एजेंट है। आप इसे अपनी त्वचा के लिए स्क्रब और मॉइस्चराइजर दोनों के रूप में उपयोग कर सकते हैं।

शहद में चीनी मिलाकर इसे 2 मिनट तक होंठों पर स्क्रब करें, इससे डेड स्किन निकल जाएगी और होंठ मुलायम हो जाएंगे।

अगर होंठ ज्यादा फट रहे हैं, तो रात को सोते समय शहद लगाकर सोएं। इससे रात भर में होंठ ठीक हो जाएंगे और फटे होंठ से राहत मिलेगी।

नारियल तेल:

नारियल तेल सर्दियों में एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह स्किन को सूखने से बचाता है और मुलायम बनाता है।

यह होंठों से पिगमेंटेशन को कम करता है और पिंक लिप्स पाने में मदद करता है।

रात को सोने से पहले नारियल तेल लगाएं, इससे आपके होंठ सॉफ्ट और गुलाबी बनेंगे।

घी:

घी भी एक बेहतरीन मॉइस्चराइजर है जो होंठों को नमी प्रदान करता है।

यह होंठों को मुलायम और कोमल बनाए रखता है।

सर्दियों में इसे अपने होंठों पर रात में लगाकर सोएं, इससे होंठों की नमी बनी रहेगी।

होममेड लिप बाम:

अगर आप नेचुरल लिप बाम बनाना चाहते हैं, तो यह तरीका अपनाएं:

  • आधा चम्मच मलाई
  • थोड़ा सा दालचीनी पाउडर
  • चुटकी भर हल्दी

इन तीनों चीजों को अच्छे से मिला कर एक पेस्ट तैयार करें और इसे रात को सोते वक्त अपने होंठों पर लगाएं। यह बाम आपके होंठों को नमी और मुलायम बनाता है, दालचीनी एक्सफोलिएट करती है और हल्दी से होंठों का रंग सुधरता है।

इन उपायों से आप अपने होंठों को सर्दियों में भी मुलायम और सॉफ्ट बना सकते हैं।

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5 Tips to Reduce Belly Fat in winter – सर्दियों में कम करना चाहते हैं बेली फैट? सुबह खाली पेट जरूर पिएं ये चीजें https://chandigarhnews.net/tips-to-reduce-belly-fat-in-winter/ https://chandigarhnews.net/tips-to-reduce-belly-fat-in-winter/#respond Wed, 22 Jan 2025 11:12:48 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56947 5 Tips to Reduce Belly Fat in winter – सर्दियों में कम करना चाहते हैं बेली फैट? सुबह खाली पेट

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5 Tips to Reduce Belly Fat in winter – सर्दियों में कम करना चाहते हैं बेली फैट? सुबह खाली पेट जरूर पिएं ये चीजें

5 Tips to Reduce Belly Fat in winter – सर्दियों में बेली फैट कम करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही डाइट और शॉट्स का सेवन इसे आसान बना सकता है। इन हेल्दी शॉट्स के जरिए आप न केवल वजन कम कर सकते हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कुछ शॉट्स के बारे में, जिन्हें खाली पेट सुबह पीने से आपको लाभ मिलेगा:

जीरा वॉटर शॉट:

जीरा मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, पाचन में सुधार करता है और सूजन को कम करने में मदद करता है। इसे बनाने के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा रातभर भिगोकर रखें। सुबह इसे छानकर पिएं। यह आपके पाचन तंत्र को बेहतर बनाएगा और वजन घटाने में मदद करेगा।

एप्पल साइडर विनेगर शॉट:

कुछ स्टडीज़ के अनुसार, एप्पल साइडर विनेगर वजन घटाने में मदद करता है और यह शरीर के अन्य फायदे भी देता है। हालांकि, इसे अधिक मात्रा में न पिएं। एक गिलास पानी में एक से दो चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर सुबह पिएं। यह आपके ब्लड शुगर लेवल को भी नियंत्रित करेगा।

नीबूं और अदरक शॉट:

नीबूं में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं, वहीं अदरक मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देने के साथ भूख को कम करने और वजन घटाने में मदद करता है। एक नींबू का रस और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर पानी में डालें और सुबह खाली पेट पिएं।

दालचीनी और शहद शॉट:

दालचीनी ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है, भूख को कम करती है और मेटाबॉलिज्म को तेज करती है। वहीं शहद डिटॉक्सीफाई करने में मदद करता है। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और आधा चम्मच दालचीनी पाउडर डालकर पिएं। यह आपके शरीर को अंदर से साफ करेगा और फैट बर्न करेगा।

मेथी वॉटर शॉट:

मेथी के बीज ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करते हैं और पाचन में मदद करते हैं। यह आपके मेटाबॉलिज्म को तेज कर सकते हैं और भूख को भी नियंत्रित करने में मदद करते हैं। एक गिलास पानी में एक चम्मच मेथी के बीज रातभर भिगोकर रखें। सुबह इसे छानकर पिएं। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करेगा।

इन शॉट्स को अपनी सुबह की आदत में शामिल करने से न केवल बेली फैट कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह शरीर को ऊर्जा और पोषण भी प्रदान करेगा।

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