Kahaniya – Chandigarh News https://chandigarhnews.net Latest Chandigarh News Mon, 12 May 2025 06:53:15 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://chandigarhnews.net/wp-content/uploads/2025/04/chandigarh-news-logo-1.png Kahaniya – Chandigarh News https://chandigarhnews.net 32 32 Machli ki Kahani – सिमी मछली की शरारतें https://chandigarhnews.net/machli-ki-kahani/ https://chandigarhnews.net/machli-ki-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 14:30:58 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56259 Machli ki Kahani – सिमी मछली की शरारतें Machli ki Kahani –एक बार ढोलकपुर जंगल के एक तालाब में सिमी

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Machli ki Kahani – सिमी मछली की शरारतें

Machli ki Kahani –एक बार ढोलकपुर जंगल के एक तालाब में सिमी नाम की मछली रहती थी। सिमी थोड़ी नटखट और शरारती थी। वह हमेशा कुछ नया करने या शैतानी करने के बारे में सोचती रहती थी। एक दिन उसने अपनी माँ से कहा, “माँ, कितने दिन हो गए हम तालाब में ही हैं। चलो न, पानी के ऊपर जाते हैं। मुझे वहाँ खेलना है, प्लीज माँ।”

माँ ने जवाब दिया, “नहीं सिमी, अभी नहीं। बाहर शिकारी हो सकते हैं। रात में चलेंगे, जब कोई न हो। तब तुम खूब खेल लेना।”

सिमी ने पूछा, “शिकारी कौन होते हैं माँ, और ये क्यों हमें बाहर नहीं जाने देते?” माँ ने समझाया, “शिकारी वो होते हैं जो हमें पकड़कर जाल में डाल लेते हैं। अगर हम बाहर गए, तो वो हमें पकड़ लेंगे और हम सब अलग हो जाएंगे। समझी मेरी प्यारी सिमी?”

सिमी ने माँ की बात सुनी, लेकिन उसकी इच्छा बाहर जाने की थी। जैसे ही उसे लगा कि माँ ध्यान नहीं दे रही, वह चुपके से तालाब के ऊपर निकल गई। बाहर पहुँचते ही उसने खुला नीला आसमान देखा, चिड़ियों की मीठी आवाज सुनी और ठंडी हवा का आनंद लिया। सिमी खुश होकर खेलने लगी।

Sharmili Kahani – शर्मीली सिम्मी

लेकिन जैसे ही वह आगे बढ़ने की कोशिश करती है, वह महसूस करती है कि उसका शरीर जाल में फँस चुका है। एक आवाज आती है, “वाह, आज तो मजा आ गया! पहली बार ही इतनी अच्छी मछली पकड़ी।” शिकारी ने जाल खींचा। सिमी डरते हुए कहती है, “भाई, मुझे पानी से बाहर मत निकालो! मैं कैसे जिंदा रहूँगी?” शिकारी जवाब देता है, “सॉरी, मैं कुछ नहीं कर सकता। मुझे मछलियाँ चाहिए।”

सिमी दिमाग लगाकर सोचती है और शिकारी से कहती है, “अगर मैं तुम्हें और मछलियाँ दूँ, तो क्या तुम मुझे छोड़ोगे?” शिकारी थोड़ी राहत महसूस करता है और पूछता है, “कैसे?” सिमी कहती है, “मेरे पास और भी मछलियाँ हैं। मैं उन्हें लाकर तुम्हारे पास लाऊँगी। हम सब दोस्त मिलकर एक साथ रहेंगे।”

शिकारी ने सोचा, “क्या सच में?” सिमी मुस्कुराते हुए कहती है, “अब तुम्हारी मर्जी है। एक मछली चाहती हो या बहुत सारी?” शिकारी जाल को ढीला कर देता है और कहता है, “ठीक है, जल्दी जाओ और सबको लेकर आओ। मैं यहीं इंतजार करूंगा।”

जैसे ही जाल खुलता है, सिमी तुरंत नीचे अपनी माँ के पास जाती है और खुशी से माँ को गले लगाते हुए कहती है, “माँ, तुम बहुत अच्छी हो! अब मैं तुम्हारी हर बात मानूँगी।”

शिकारी अभी भी सोचता रह गया कि सिमी उसे और मछलियाँ लाकर देगी, लेकिन सिमी ने अपनी माँ से मिलकर पूरी तरह से अपनी गलती समझ ली थी।

मोरल: हमें कभी भी अपनी माँ और पेरेंट्स की बात माननी चाहिए, क्योंकि वे हमेशा हमारी भलाई के लिए सोचते हैं। अगर गलती से हम मुसीबत में फँस जाएं, तो हमें उसकी सिचुएशन से निकलने का रास्ता सोचना चाहिए।

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Sharmili Kahani – शर्मीली सिम्मी https://chandigarhnews.net/sharmili-kahani/ https://chandigarhnews.net/sharmili-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 13:30:08 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56253 Sharmili Kahani – शर्मीली सिम्मी Sharmili Kahani – एक बार की बात है, ढोलकपुर गाँव में शम्मी नाम की एक

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Sharmili Kahani – शर्मीली सिम्मी

Sharmili Kahani – एक बार की बात है, ढोलकपुर गाँव में शम्मी नाम की एक प्यारी सी बच्ची रहती थी। शम्मी पढ़ाई में बहुत होशियार थी, और उसकी क्लास में हमेशा सबसे अच्छे नंबर आते थे। लेकिन शम्मी में एक कमी थी, वह बहुत शर्माती थी।

स्कूल के बच्चे और घर वाले उसे “शर्मीली शम्मी” कहकर चिढ़ाते थे। जब भी कोई बच्चा उसे ये कहता, तो शम्मी को बहुत बुरा लगता, लेकिन अपनी शर्म के कारण वह कुछ नहीं कहती थी और बस चुपचाप वहाँ से चली जाती थी।

एक दिन शम्मी के घर उसकी बुआ अपने बच्चों के साथ आई। बुआ शम्मी को बहुत प्यार करती थीं और शम्मी भी उन्हें बहुत चाहती थी। लेकिन शम्मी शर्म के मारे बुआ से भी कुछ नहीं कह पाती थी। जैसे ही बुआ के बच्चे घर के अंदर आए, उन्होंने शम्मी को देख कर चिल्लाया, “ओर शर्मीली शम्मी! कैसी हो?” और फिर जोर-जोर से हंसने लगे।

बुआ ने बच्चों को डांटा, लेकिन वे फिर भी शम्मी को चिढ़ाते रहे और उसके खिलौनों से खेलने लगे। बुआ को पता था कि शम्मी शर्मीली है, इसीलिए वह कुछ नहीं कह पाती। बुआ ने शम्मी के लिए चॉकलेट्स और गिफ्ट्स लाए थे। बुआ ने शम्मी को पास बुलाकर कहा, “यह सब तुम्हारे लिए है।”

Taakat ki Kahani – तुमसे न हो पाएगा

शम्मी शरमाते हुए “थैंक यू बुआ” कहती है, लेकिन जैसे ही वह चॉकलेट्स लेने लगी, बुआ के बच्चे आकर उसे ले लेने लगे। शम्मी उन्हें मना नहीं कर पाई क्योंकि शर्म के मारे वह कुछ कह नहीं सकी। वे बच्चे सारी चॉकलेट्स खा गए और शम्मी को बिना कुछ कहे अंदर चली गई।

अपने कमरे में बैठ कर शम्मी बहुत रोने लगी। वह सोचने लगी, “मैं ऐसी क्यों हूँ? मैं किसी से बात क्यों नहीं कर पाती? क्यों मुझे इतनी शर्म आती है?” इसी उलझन में वह अकेले रोने लगी। तभी बुआ उसके पास आईं और उसे गले से लगा लिया।

बुआ ने कहा, “शम्मी, मुझे पता है तुम बहुत समझदार और होशियार हो। लेकिन तुम्हारी शर्म के कारण तुम अपनी बात नहीं रख पाती। इस पर तुम्हें क्या करना चाहिए, सुनो। सबसे पहले यह याद रखना कि तुम किसी से कम नहीं हो, तुम में भी बहुत सारी खूबियाँ हैं।

अब तुम जो सबसे अच्छा महसूस करती हो, उससे बात करना शुरू करो। जितना तुम दूसरों से बात करोगी और उनकी बातें सुनोगी, धीरे-धीरे तुम्हारी शर्म कम हो जाएगी। समझी मेरी प्यारी बेटी?”

शम्मी मुस्कुराते हुए बोली, “हाँ बुआ, अब मुझे समझ आ गया।”

मोरल: हमें इतनी ज्यादा शर्म नहीं करनी चाहिए कि उससे हमें नुकसान उठाना पड़े। हमें अपनी बात रखनी चाहिए और अपने आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहिए।

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Taakat ki Kahani – तुमसे न हो पाएगा https://chandigarhnews.net/taakat-ki-kahani/ https://chandigarhnews.net/taakat-ki-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 12:30:08 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56252 Taakat ki Kahani – तुमसे न हो पाएगा Taakat ki Kahani – एक बार की बात है, ढोलकपुर जंगल में

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Taakat ki Kahani – तुमसे न हो पाएगा

Taakat ki Kahani – एक बार की बात है, ढोलकपुर जंगल में चीका और मीका नाम के दो भाई खेल रहे थे। तभी वहाँ पर रुस्तम शेर और रूपा शेरनी आते हैं। दोनों बच्चों को एक साथ खेलते हुए देखकर खुश हो जाते हैं, क्योंकि अक्सर ये दोनों भाई आपस में लड़ते रहते थे और कम ही साथ खेलते थे।

रुस्तम शेर ने बच्चों से कहा, “अरे मेरे प्यारे बच्चों, चीका और मीका, खेलते-खेलते आपस में लड़ाई मत करना। मीका, तुम अपने बड़े भाई को ज्यादा परेशान मत करना।”

रूपा शेरनी मुस्कुराते हुए बोली, “अच्छा बच्चों, ज्यादा समय मत लगाना और खेलने के बाद जल्दी घर आना।”

चीका और मीका हाँ में सिर हिलाते हैं और फिर खेलना शुरू कर देते हैं। खेलते-खेलते, चीका ने इतनी तेज़ी से गेंद मारी कि गेंद सीधे एक कुएं में गिर गई। मीका ने कहा, “भाई, गेंद तो कुएं में गिर गई, अब क्या करेंगे?”

Mendak ki Kahani – झगड़ालू मेंढक की कहानी

चीका ने हिम्मत दिखाई और कहा, “तुम परेशान मत हो, मैं अभी जाकर गेंद निकाल लाता हूँ।”

लेकिन जैसे ही चीका कुएं में उतरने की कोशिश करता है, उसका पैर फिसल जाता है और वह कुएं में गिर जाता है।

मीका डर के मारे जोर-जोर से चिल्लाने लगता है, “भाई-भाई, कोई बचाओ मेरे भाई को। मैं तो बहुत छोटा हूँ, मैं कैसे बचा पाऊँगा उसे?” लेकिन वहां कोई नहीं था जो उसकी मदद कर सके।

तभी मीका को एक रस्सी दिखी। वह दौड़ते हुए रस्सी को उठाता है और कुएं में फेंकते हुए कहता है, “भाई, इस रस्सी को पकड़ना। मैं तुमको बाहर खींचूंगा।”

चीका रस्सी पकड़ता है और मीका अपनी पूरी ताकत से रस्सी खींचता है। क्योंकि चीका बड़ा और भारी था, मीका को बहुत मेहनत करनी पड़ी, लेकिन उसने हार नहीं मानी। अपनी पूरी ताकत लगाते हुए, मीका रस्सी खींचता है और आखिरकार चीका कुएं से बाहर आ जाता है।

कुएं से बाहर आने के बाद, चीका ने मीका को गले लगा लिया और गुस्से से रोते हुए बोला, “मेरे छोटे भाई, तुमने मुझे बचा लिया। तुम मुझसे कितने छोटे हो, तुम्हारे पास इतनी ताकत आई कहां से?”

मीका हंसते हुए बोला, “भाई, मुझे नहीं पता कि मुझे इतनी ताकत कहां से आई, लेकिन एक बात मैंने अच्छे से समझ ली है। अगर कोई कहे कि ये काम तुमसे नहीं हो पाएगा, तो मैं अब कभी इस बात को नहीं मानूंगा। मैं जानता हूं कि कोई भी काम ऐसा नहीं है, जो हम नहीं कर सकते।”

इसके बाद, दोनों भाई खुशी-खुशी घर लौटे।

मोरल: हमें कभी भी अपनी ताकत और क्षमता को कम नहीं समझना चाहिए। अगर हम मेहनत और विश्वास के साथ कोई काम करें, तो हम उसे कर सकते हैं।

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Mendak ki Kahani – झगड़ालू मेंढक की कहानी https://chandigarhnews.net/mendak-ki-kahani/ https://chandigarhnews.net/mendak-ki-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 11:30:08 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56251 Mendak ki Kahani – झगड़ालू मेंढक की कहानी Mendak ki Kahani – एक बार की बात है, ढोलकपुर जंगल में

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Mendak ki Kahani – झगड़ालू मेंढक की कहानी

Mendak ki Kahani – एक बार की बात है, ढोलकपुर जंगल में मेडी नाम का एक मेंढक रहता था। वह था तो सबसे बड़ा, लेकिन बिल्कुल समझदार नहीं था। उसका पसंदीदा काम था दूसरों से लड़ाई करना। वह हमेशा लड़ने का मौका ढूंढ़ता रहता था। उसकी इस आदत से उसके बच्चे और आस-पड़ोस के अन्य मेंढक भी परेशान रहते थे।

जब भी कोई मेढक मेडी को अपनी तरफ आता देखता, तो वह उसे देखकर कहता, “अरे भागो-भागो, झगड़ालू ताऊ आ गए, पता नहीं कब शुरू हो जाए झगड़ा!”

एक दिन बगल के मेंढक के घर पार्टी हो रही थी। उस मेंढक ने सभी मेंढकों को पार्टी में बुलाया, बस मेडी के परिवार को छोड़कर। पार्टी में सभी मेंढक मस्ती कर रहे थे, अच्छे-अच्छे पकवान खा रहे थे। पकवान की खुशबू और गाने की आवाज मेडी के घर तक पहुंच रही थी।

Bhale Insaan ki Kahani – इतने भले मत बन जाना साथी

यह सब देखकर मेडी की पत्नी को गुस्सा आ गया और उसने कहा, “क्या जी, तुम्हारे झगड़ालू स्वभाव की वजह से हमें कोई नहीं बुलाता। देखो कितनी अच्छी खुशबू आ रही है और हम पार्टी का मजा नहीं ले पा रहे। जाओ, अब मैं रात का खाना नहीं बनाऊंगी, बाहर से खाना मंगाओ!”

अपनी पत्नी की बात सुनकर मेडी गुस्से में भरकर बाजार निकलता है और सोचता है कि वह सबको सबक सिखाएगा। तभी उसकी मुलाकात शीरो नामक साँप से होती है। शीरो साँप को देखकर मेडी को एक बुरा विचार आता है।

वह मन ही मन सोचता है, “अब मैं शीरो साँप को सबके घर का पता बता दूंगा, फिर वह सबको एक-एक करके खा जाएगा।” और ऐसा सोचते हुए, वह शीरो साँप के पास पहुंचता है और कहता है, “शीरो जी, मैं आपको सबके घर का पता दे सकता हूँ, आप उन्हें खा सकते हो।”

शीरो साँप कहता है, “क्या तुम सच में मुझे अपने सभी साथियों को खाने के लिए कह रहे हो? क्या तुम एक बार फिर से सोच नहीं सकते?” लेकिन मेडी जोर देकर कहता है, “हां, मैंने अच्छे से सोच लिया है, वे सब मुझे बहुत परेशान करते थे। अब मैं उन्हें सबक सिखाऊंगा।”

फिर मेडी शीरो साँप को अपने घर ले जाता है और उसे एक-एक करके सभी मेंढकों का घर बता देता है। शीरो साँप धीरे-धीरे सभी मेंढकों को खा लेता है। जब वह सबको खा चुका, तो वह मेडी के घर पहुंचता है और कहता है, “वाह, बहुत अच्छा किया मेडी, आज तो मज़ा आ गया। लेकिन मुझे अब और भूख लग रही है। तुम्हारे परिवार को छोड़कर और कोई मेंढक नहीं बचा, तो क्या मैं तुम्हारे परिवार को भी खा सकता हूँ?”

मेडी ने गुस्से में कहा, “तुमने मेरे साथ धोखा किया! मैं तुम्हें पार्टी दे रहा था और तुमने मेरे साथियों को खा लिया! अब तुम मुझे खाओगे?” उसकी पत्नी पीछे से बोली, “मैंने कितनी बार तुमसे कहा था कि दूसरों से झगड़ा मत करो, थोड़ा गुस्से पर काबू रखो। अब देखो, सबको खा गया और अब हमारी बारी है।”

फिर शीरो साँप ने मेडी, उसकी पत्नी और बच्चों को एक-एक करके खा लिया और इस तरह सारे मेंढक खत्म हो गए।

मोरल: हमें कभी भी दूसरों से झगड़ा नहीं करना चाहिए। हमें हमेशा मिलजुलकर रहना चाहिए और अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए।

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Bhale Insaan ki Kahani – इतने भले मत बन जाना साथी https://chandigarhnews.net/bhale-insaan-ki-kahani/ https://chandigarhnews.net/bhale-insaan-ki-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 10:30:07 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56250 Bhale Insaan ki Kahani – इतने भले मत बन जाना साथी Bhale Insaan ki Kahani – एक बार की बात

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Bhale Insaan ki Kahani – इतने भले मत बन जाना साथी

Bhale Insaan ki Kahani – एक बार की बात है, ढोलकपुर जंगल में चम्पा लोमड़ी अपनी मस्ती में चली जा रही थी। तभी उसे बहुत प्यास लगती है और वह इधर-उधर देखने लगती है। तभी उसे थोड़ी दूर पर एक कुआं दिखाई देता है। वह तुरंत कुएं के पास जाती है, और देखती है कि कुआं पानी से भरा हुआ है।

बहुत खुश होकर वह कुएं से पानी पीने लगती है। पानी पीते-पीते अचानक उसका पैर फिसल जाता है और चम्पा लोमड़ी कुएं में गिर जाती है। कुएं का पानी बहुत मीठा होता है, और चम्पा को पानी बहुत अच्छा लगता है। वह अब आराम से पानी पीने लगती है।

जब चम्पा लोमड़ी अच्छे से पानी पी लेती है, तो वह बाहर निकलने की कोशिश करती है। वह एक बार छलांग लगाती है, फिर दूसरी बार और तीसरी बार भी। लेकिन वह बाहर नहीं निकल पाती। अब उसे डर लगने लगता है कि कहीं वह उसी कुएं में ही ना रह जाए। उसे सोचने लगता है कि अगर वह कुएं में रह गई तो घर में रखी गरमा-गरम आलू टिक्की कौन खाएगा। यही सोचकर वह जोर-जोर से चिल्लाने लगती है, “बचाओ, बचाओ!”

Samay ki Kahani – बात समय की

तभी उसकी आवाज सुनकर चंपू गधा आता है और उससे पूछता है, “क्या हुआ चम्पा लोमड़ी, तुम कुएं के अंदर क्या कर रही हो?” चम्पा लोमड़ी जवाब देती है, “अरे चंपू गधे, मैं बचाओ-बचाओ नहीं कह रही थी, मैं तो कह रही थी आओ आओ, तुम भी मीठा-मीठा पानी पी लो। इस कुएं का पानी बहुत मीठा है।”

चम्पा लोमड़ी की बात सुनकर चंपू गधा बिना कुछ सोचे-समझे कुएं में कूद जाता है और पानी पीने लगता है। फिर वह चम्पा से कहता है, “हां चम्पा, तुम बिल्कुल सही कह रही थी, इस कुएं का पानी सच में बहुत मीठा है।”

जब चंपू गधा अच्छे से पानी पी लेता है, तो वह चम्पा से कहता है, “अच्छा चम्पा, अब बाहर कैसे निकलेंगे? ये तो बताओ।” चम्पा लोमड़ी मुस्कुराते हुए कहती है, “मेरे पास एक बहुत अच्छा आइडिया है। ऐसा करो, तुम कुएं की दीवार को पकड़ कर खड़े हो जाओ। मैं तुम्हारे ऊपर चढ़कर कुएं से बाहर निकल जाऊँगी। और फिर तुम्हें भी बाहर निकाल दूँगी।”

चंपू गधा बिना सोचें-समझे उसकी बात मान लेता है और कुएं की दीवार के पास खड़ा हो जाता है। चम्पा लोमड़ी मुस्कुराते हुए उस पर चढ़ती है और कुएं से बाहर निकल जाती है। उसके बाहर निकलते ही चंपू गधा कहता है, “अरे चम्पा, मुझे तो बाहर निकलने का आइडिया बताओ!” तभी चम्पा कहती है, “मेरे पास तो सिर्फ एक आइडिया था, अपने खुद के निकलने का। अब तुम अपना देखो।” फिर चंपू गधा जोर-जोर से चिल्लाने लगता है, “बचाओ-बचाओ!” लेकिन अब वहाँ कोई नहीं आता।

मोरल: हमें कुछ भी करने से पहले एक बार जरूर सोचना चाहिए, कहीं कोई अपने फायदे के लिए हमारा गलत फायदा तो नहीं उठा रहा। और हमें हमेशा ऐसे लोगों से सतर्क भी रहना चाहिए।

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Samay ki Kahani – बात समय की https://chandigarhnews.net/samay-ki-kahani/ https://chandigarhnews.net/samay-ki-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 09:30:25 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56187 Samay ki Kahani – बात समय की Samay ki Kahani – फुनटी नाम का एक लड़का था जो बहुत समझदार

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Samay ki Kahani – बात समय की

Samay ki Kahani – फुनटी नाम का एक लड़का था जो बहुत समझदार था। उसे अपना हर काम समय पर करना अच्छा लगता था। वह समय पर स्कूल जाता, समय पर पढ़ाई करता, समय पर खाना खाता और समय पर खेलता।

वहीं फुनटी के आस-पास रहने वाले कुछ बच्चे स्कूल से लौटने के बाद पूरा समय खेल-कूद में लगाते, खूब शोर मचाते, और हर रोज स्कूल भी देर से पहुंचते थे। फुनटी अक्सर उन्हें हर काम समय पर करने की सलाह देता, लेकिन वे उसकी बातों को मजाक में उड़ा देते थे।

एक दिन जब फुनटी अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, तो जैसे ही एक घंटा पूरा हुआ, उसने अपने घर जाने का फैसला किया। उसके दोस्तों ने उसे और खेलने के लिए रोका, लेकिन फुनटी ने फिर भी अपनी बात मानी और घर लौटने लगा। तभी उसके दोस्त उसे चिढ़ाते हुए कहने लगे, “रोबोट, रोबोट! फुनटी तो रोबोट है!” और फिर वे अपना खेल शुरू कर देते हैं।

Thande Mausam ki Kahani – अपना-अपना काम

कुछ दिन बाद, एक बड़ी सी गाड़ी में कुछ लोग फुनटी के घर पूछते हुए आ पहुंचे। खेल रहे बच्चे उन्हें फुनटी का घर बताते हैं, और वे सब उनके पीछे-पीछे जाते हैं। गाड़ी का दरवाजा खुलता है, और कोट पहने एक लंबा आदमी बाहर आता है। उसके हाथ में एक बैग था। वह आदमी फुनटी से मिलता है, और फिर फुनटी कहता है, “थैंक यू सर, मुझे इतना बड़ा अवॉर्ड देने के लिए।”

उसके दोस्त हैरान होते हैं, “अवॉर्ड! फुनटी को अवॉर्ड? लेकिन किस चीज के लिए? क्या रोबोट बनने के लिए?”

तभी वह आदमी बोलता है, “धन्यवाद तो हमें आपको कहना चाहिए। इतनी छोटी सी उम्र में आपने इतना बड़ा काम कर दिखाया। आपने पूरी दुनिया में सबसे छोटी उम्र में सबसे ज्यादा चीजें याद रखने का नया रिकॉर्ड बनाया है। यह हम सब के लिए गर्व की बात है।” और फिर वह आदमी फुनटी को अवॉर्ड देता है और वहां से चला जाता है।

फुनटी के दोस्तों को अब खुद पर शर्म आने लगती है कि वे कैसे उसे चिढ़ाते थे। फिर फुनटी उनके पास जाता है और कहता है, “दोस्तों, हमें समय को हमेशा रिस्पेक्ट देना चाहिए। हर काम समय पर करने से हमें एक दिन इसका बड़ा फायदा मिलता है।”

मोरल: हमें हर काम अपने समय पर करना चाहिए और हमेशा समय का सम्मान करना चाहिए। जो काम हमने समय पर किया, उसका फायदा एक दिन हमें जरूर मिलेगा।

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Thande Mausam ki Kahani – अपना-अपना काम https://chandigarhnews.net/thande-mausam-ki-kahani/ https://chandigarhnews.net/thande-mausam-ki-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 08:30:25 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56186 Thande Mausam ki Kahani – अपना-अपना काम Thande Mausam ki Kahani – ठंड का मौसम आ चुका था और ढोलकपुर

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Thande Mausam ki Kahani – अपना-अपना काम

Thande Mausam ki Kahani – ठंड का मौसम आ चुका था और ढोलकपुर जंगल में सर्दी से सब परेशान थे। दांतों को काटने वाली ठंड से बचने के लिए मोंटी बंदर, चम्पा लोमड़ी, और गज्जू हाथी ने मिलकर एक साथ रहने का फैसला किया। उन्होंने तय किया कि चम्पा लोमड़ी खाना बनाएगी, गज्जू हाथी घर का बाकी काम करेगा, और मोंटी बंदर बाहर से खाना और पानी लेकर आएगा।

सबने खुशी-खुशी अपना काम शुरू किया और समय से पहले ही सब काम खत्म हो जाते। गज्जू हाथी घर का काम जल्दी निपटा लेता, मोंटी बंदर बाजार से खाने-पीने का सामान ले आता, और चम्पा लोमड़ी स्वादिष्ट खाना बना कर रख देती। इस तरह तीनों दोस्त मिलकर ठंड का मजा ले रहे थे।

लेकिन एक दिन बलैकी कौआ ने देखा कि ये तीनों दोस्त इतनी अच्छी तरह से ठंड बिता रहे हैं, जबकि वह अकेला था और उसके पास कुछ भी नहीं था। वह मन ही मन सोचने लगा कि क्यों न इन तीनों को अलग किया जाए। उसे मोंटी बंदर दिखाई देता है और वह मोंटी से कहता है, “इतनी ठंड में तुम सामान लेने जा रहे हो? चम्पा और गज्जू तो बाहर नहीं निकलते, तुम तो उनके नौकर हो।”

मोंटी बंदर ये सुनकर गुस्से में आ जाता है और चम्पा लोमड़ी से कहता है कि अब से वह बाहर नहीं जाएगा। चम्पा लोमड़ी उसे समझाने की कोशिश करती है कि सब काम बराबरी से होने चाहिए, लेकिन मोंटी बंदर नहीं मानता। फिर चम्पा लोमड़ी खुद बाहर सामान लेने जाती है, और मोंटी बंदर घर में खाना बनाने लगता है। लेकिन सब्जी काटते वक्त उसकी उंगली कट जाती है, और फिर गैस पर खाना बनाते वक्त उसका हाथ जल जाता है।

Saanp ki Kahani – घमंडी साँप और चींटी

यह सब देख चम्पा लोमड़ी और गज्जू हाथी आते हैं और मोंटी बंदर को समझाते हैं। चम्पा लोमड़ी कहती है, “घर का काम करने में कोई नौकर नहीं होता। जो काम आता है, उसे उसी को करना चाहिए।” मोंटी बंदर समझ जाता है और माफी मांगता है। फिर चम्पा लोमड़ी स्वादिष्ट खाना बनाती है और सब मिलकर खाते हैं।

मोरल: घर के कामों में, एक-दूसरे की मदद करते हुए हमें कभी नहीं सोचना चाहिए कि यह काम मेरा नहीं है। हमें हमेशा मिल-जुल कर काम करना चाहिए और खुशी से रहना चाहिए।

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Saanp ki Kahani – घमंडी साँप और चींटी https://chandigarhnews.net/saanp-ki-kahani/ https://chandigarhnews.net/saanp-ki-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 07:30:25 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56185 Saanp ki Kahani – घमंडी साँप और चींटी Saanp ki Kahani – एक बार ढोलकपुर जंगल में शीरो नाम का

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Saanp ki Kahani – घमंडी साँप और चींटी

Saanp ki Kahani – एक बार ढोलकपुर जंगल में शीरो नाम का एक साँप रहता था। वह बहुत छोटा और दुबला-पतला था। उसके दोस्तों ने उसे चिढ़ाने के लिए “हवा-हवा” कहना शुरू कर दिया। शीरो को यह बहुत बुरा लगता, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकता था, क्योंकि वह बहुत कमजोर था।

फिर शीरो ने ठान लिया कि वह खूब खाएगा और मोटा-तगड़ा बन जाएगा। वह खाना खा-खाकर धीरे-धीरे मोटा होने लगा। अब वह हर किसी से खाना छीनने लगा। जब वह अपने दोस्तों के पास जाता, तो वे उससे डरकर भाग जाते। शीरो को अब अपनी ताकत पर घमंड होने लगा। वह सोचने लगा कि अब वह किसी से भी डराने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल करेगा।

एक दिन, शीरो ने सोचा कि वह अब अपना नया घर बनाएगा। परंतु इतने बड़े आकार में काम करना उसे पसंद नहीं आया। वह सोचा कि किसी और को डराकर उसका घर ले लेता हूँ। इसी सोच के साथ, शीरो मोंटी बंदर के घर जाता है। मोंटी बंदर डर से अपना घर शीरो को दे देता है और भाग जाता है। शीरो घर में घुसता है और कहता है, “यह घर बड़ा है, लेकिन खाने का कुछ नहीं है।”

Maa ki Kahani – माँ की डांट

फिर, शीरो को सोना चींटी का घर दिखाई देता है। वह उसके घर में भी घुसने की कोशिश करता है, लेकिन सोना चींटी डरने के बजाय अपनी सभी चींटियों को बुला लेती है। सोना चींटी कहती है, “यह घर मेरा है। अगर तुम यहाँ आए तो हम सब तुम्हें काट लेंगे।” बहुत सारी चींटियाँ देखकर शीरो डर जाता है और कहता है, “मुझे तुम्हारा घर नहीं चाहिए, मैं कहीं और अपना घर बना लूँगा।” फिर शीरो वहाँ से भाग जाता है।

सोना चींटी और उसकी साथी चींटियाँ एकजुट होकर शीरो की चुनौती का सामना करती हैं और शीरो को डराकर उसे हार मानने पर मजबूर कर देती हैं।

मोरल: हमें कभी भी अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हमें हमेशा दूसरों के साथ मिलकर रहना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए, न कि उन्हें डराना या परेशान करना।

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Maa ki Kahani – माँ की डांट https://chandigarhnews.net/maa-ki-kahani/ https://chandigarhnews.net/maa-ki-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 06:30:23 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56184 Maa ki Kahani – माँ की डांट Maa ki Kahani – ढोलकपुर जंगल में रुस्तम शेर अपने दोनों बच्चों चीका

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Maa ki Kahani – माँ की डांट

Maa ki Kahani – ढोलकपुर जंगल में रुस्तम शेर अपने दोनों बच्चों चीका और मीका को समझा रहा था, “अरे मेरे प्यारे बच्चों, माँ की बातों का बुरा मत मानो। माँ जो भी कहती है, वह तुम्हारे भले के लिए होती है। माँ की बातों को समझकर माना करो, मेरे लाल चीका और मेरे पीले मीका।”

रुस्तम शेर की बातों को सुनकर चीका पहले बोलता है, “नहीं, मुझे नहीं मानना। जब देखो तब माँ कुछ न कुछ बोलती ही रहती है।” तभी मीका बोलता है, “हाँ, हाँ पापा! भाई बिल्कुल सही कह रहा है।

माँ के पास हमें डांटने के अलावा और कोई काम नहीं है। खाना देर से खाओ तो डांट, टीवी ज्यादा देर देखो तो डांट, पढ़ाई न करो तो डांट, खिलौना तोड़ दो तो डांट। डांट, डांट, और सिर्फ डांट! अब हम गुस्से में हैं, किसी से बात नहीं करेंगे, न खेलेंगे, न पढ़ेंगे।”

दोनों की बात सुनकर रुस्तम शेर मुस्कुराते हुए कहता है, “ठीक है, तुम्हें अगर बात नहीं करनी तो मत करो, लेकिन ये बताओ, तुम्हें गज्जू हाथी कैसा लगता है?”

Ladai ki Kahani – कीचू कछुए की उसकी बहन से हुई लड़ाई

चीका तुरंत बोलता है, “कौन, गज्जू दादा! वो तो बहुत अच्छे हैं, बहुत समझदार भी। उनके साथ खेलना और उनसे बात करना बहुत अच्छा लगता है, और हाँ, वो पढ़ाते भी बहुत अच्छा हैं।”

मीका भी बोलता है, “हाँ पापा, गज्जू दादा बहुत अच्छे हैं।”

रुस्तम शेर फिर पूछता है, “अच्छा, मोंटी बंदर कैसा लगता है?”

चीका और मीका एक साथ बोलते हैं, “मोंटी बंदर! वो तो बहुत शैतान है। हमेशा सबको परेशान करता रहता है। एक दिन मैं बैठकर जूस पी रहा था, और उसने चुपके से आकर मेरा जूस ले लिया।”

मीका भी बोलता है, “हां, पापा! मोंटी बंदर ने तो मेरा चश्मा भी ले लिया था, जो आप मेरे लिए दूसरे जंगल से लेकर आए थे।”

रुस्तम शेर मुस्कुराते हुए कहता है, “देखो, तुम्हारी माँ तुम दोनों को इसलिए डांटती है ताकि तुम बड़े होकर गज्जू हाथी की तरह समझदार बनो, न कि मोंटी बंदर की तरह।”

रुस्तम शेर की यह बात सुनकर दोनों बच्चे ध्यान से सुनते हैं। तभी रूपा शेरनी वहाँ आती है और गरमागरम रसगुल्ला लेकर आती है। दोनों बच्चे तुरंत उठकर माँ के गले लगते हैं और कहते हैं, “माँ, हमें माफ कर दो। हम नहीं बनना मोंटी बंदर की तरह। आज से हम दोनों आपकी सारी बातें मानेंगे।”

रूपा शेरनी उन्हें प्यार करती है और फिर सब मिलकर गरमागरम रसगुल्ला खाते हैं।

मोरल: अगर कभी भी आपके बड़े आपको समझाए या कुछ बोलें, तो उनकी बातों को मानना चाहिए, क्योंकि बड़े हमेशा हमारी भलाई के लिए ऐसा करते हैं ताकि हम दुनिया के सबसे अच्छे बच्चे बन सकें।

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Ladai ki Kahani – कीचू कछुए की उसकी बहन से हुई लड़ाई https://chandigarhnews.net/ladai-ki-kahani/ https://chandigarhnews.net/ladai-ki-kahani/#respond Sun, 05 Jan 2025 05:30:23 +0000 https://chandigarhnews.net/?p=56183 Ladai ki Kahani – कीचू कछुए की उसकी बहन से हुई लड़ाई Ladai ki Kahani – एक दिन ढोलकपुर जंगल

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Ladai ki Kahani – कीचू कछुए की उसकी बहन से हुई लड़ाई

Ladai ki Kahani – एक दिन ढोलकपुर जंगल में कीचू कछुआ उदास बैठा था। तभी गज्जू हाथी उसके पास आया और पूछा, “कीचू, क्या हुआ? तुम यहाँ अकेले क्यों बैठे हो, बहुत उदास लग रहे हो?”

कीचू कछुआ गहरी सांस लेते हुए बोला, “गज्जू दादा, क्या बताऊं, बहुत दुखी हूँ। हर समय मेरी माँ मुझे डांटती रहती है। तुम तो मेरी छोटी बहन कीची को जानते हो न? वह हमेशा मुझसे लड़ती रहती है।

पहले तो मेरा सामान ले लेती है और फिर मुझे ही उस सामान से खेलने नहीं देती। जब मैं ज्यादा देर टीवी देखता हूँ, तो वह जाकर माँ को शिकायत कर देती है, और माँ भी उसकी बात मानकर टीवी बंद करवा देती है। आज फिर उसने मेरा सामान लिया और मुझे गुस्सा आ गया। मैंने उसे थप्पड़ मार दिया।”

गज्जू हाथी मुस्कुराते हुए बोला, “कीचू, मैं समझ गया कि तुम क्यों दुखी हो। तुमने अपनी बहन को मारा और इसके बाद तुम्हें माँ से डांट पड़ी। लेकिन मैं तुमसे यही कहना चाहता हूँ कि तुम बड़े हो, समझदार हो।

तुम्हें अपनी बहन के साथ अच्छे से रहना चाहिए, उसे प्यार करना चाहिए। हमेशा याद रखना कि चाहे हम जितना भी लड़ लें, हमारे मुश्किल समय में हमारे भाई-बहन ही हमारे साथ होते हैं।”

Machli ki Kahani – सिमी मछली की शरारतें

इतना कहकर गज्जू हाथी वहां से चला जाता है।

कीचू कछुआ घर की ओर जाने लगता है, लेकिन गुस्से में वह चम्पा लोमड़ी को नहीं देख पाता, जो उसे खाने के लिए दौड़ रही थी। तभी उसकी छोटी बहन कीची ने आवाज दी, “भाई, भाई, जल्दी वहां से हटो! देखो, चम्पा लोमड़ी आ रही है!”

कीचू कछुआ अपनी बहन की आवाज सुनकर तेजी से दौड़ने लगता है और एक पेड़ के नीचे छिप जाता है। काफी समय बाद, जब चम्पा लोमड़ी वहाँ से चली जाती है, तब कीचू कछुआ पेड़ से बाहर आता है और सीधे अपने घर पहुँचता है।

घर पहुंचकर वह अपनी बहन को गले लगाता है और कहता है, “मुझे माफ कर दो, आज तुमने मुझे बचा लिया। गज्जू हाथी ने बिल्कुल सही कहा था, मुसीबत में सबसे पहले हमारे अपने ही हमें बचाते हैं। अब से मैं तुमसे कभी नहीं लड़ूँगा। तुम्हें हमेशा प्यार से रखूँगा।”

छोटी बहन हंसते हुए कहती है, “तो क्या अब मेरा सबसे प्यारा खिलौना मैं ले सकती हूँ?” दोनों भाई-बहन मिलकर जोर से हंसने लगते हैं।

मोरल: हमें आपस में कभी नहीं लड़ना चाहिए, हमेशा मिल-जुलकर रहना चाहिए।

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