Chandigarh and Haryana News – हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 77% कमी, सरकार का लक्ष्य है दो साल में बनाएंगे ‘Zero Stubble Burning State’
Chandigarh and Haryana News – हरियाणा सरकार ने पराली प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 77 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है, जो पर्यावरण संरक्षण और वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
शुक्रवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और हरियाणा सरकार के अधिकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक में आयोग ने हरियाणा के प्रयासों की सराहना करते हुए अगले दस दिनों को बेहद महत्वपूर्ण बताया और निगरानी को और कड़ा करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि हरियाणा ने अब अगले दो वर्षों में “जीरो स्टबल बर्निंग स्टेट” बनने का लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में सरकार किसानों को प्रोत्साहन, तकनीकी सहायता और आधुनिक मशीनों की सुविधा दे रही है, ताकि पराली जलाने की आवश्यकता न रहे।
वायु गुणवत्ता आयोग ने सराहा हरियाणा मॉडल
बैठक की अध्यक्षता वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने की। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने पराली प्रबंधन में जिस प्रकार से रणनीतिक कार्यवाही की है, वह अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन सकता है। विशेष रूप से करनाल और कुरुक्षेत्र जिलों में निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था सराहनीय रही।
मुख्य सचिव ने बताया कि किसानों को बायो-डीकंपोजर पाउडर निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने 2 लाख एकड़ क्षेत्र में यह परियोजना लागू की है। इस पाउडर के उपयोग से पराली खेत में ही गल जाती है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।
मशीनों की मदद से हो रहा पराली का प्रबंधन
हरियाणा सरकार ने 2025-26 वित्त वर्ष में पराली प्रबंधन के लिए 94 करोड़ रुपये की लागत से 7,700 नई मशीनें स्वीकृत की हैं। इसमें रोटावेटर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रॉ बेलर और हैप्पी सीडर जैसी आधुनिक मशीनें शामिल हैं।
इस योजना पर इस वर्ष 250.75 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार का अंशदान 150.45 करोड़ रुपये और राज्य सरकार का 100.30 करोड़ रुपये है।
राज्य में वर्तमान में 8.17 लाख टन क्षमता के 31 पेलेटाइजेशन और ब्रीकेटिंग संयंत्र हैं। साथ ही, 111.9 मेगावाट क्षमता के 11 बायोमास पावर प्लांट, 1 एथेनॉल संयंत्र, 2 सीबीजी (Compressed Biogas) प्लांट और 5 थर्मल पावर प्लांट भी पराली का उपयोग कर रहे हैं।
ईंट भट्ठों में पराली आधारित ईंधन का प्रयोग
राज्य के गैर-एनसीआर जिलों में ईंट भट्ठा संचालकों को 2025 तक 20 प्रतिशत और 2028 तक 50 प्रतिशत तक पराली आधारित पेलेट्स का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस कदम से न केवल पराली का उपयोग बढ़ेगा बल्कि कोयले पर निर्भरता भी कम होगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- पराली जलाने के आंकड़े: एक मजबूत सुधार की कहानी
- राज्य के कुल 31 लाख एकड़ धान क्षेत्र में से लगभग
- 40 लाख टन अवशेष इन-सिटू (खेत में ही प्रबंधन),
- 10 लाख टन एक्स-सिटू (खेत से बाहर उपयोग),
- और 22 लाख टन चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
अब तक 19,670 एकड़ क्षेत्र में किसानों ने धान की जगह वैकल्पिक फसलें अपनाई हैं — यह फसल विविधीकरण का सकारात्मक संकेत है।
सख्त निगरानी और जुर्माने की कार्रवाई
हरियाणा में 10,028 नोडल अधिकारी पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी के लिए तैनात किए गए हैं।
हरसेक सैटेलाइट सिस्टम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है और हर सत्यापित घटना में एफआईआर दर्ज की जा रही है।
अब तक
- 87 मामलों में कार्रवाई की गई है,
- 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है,
- और 20 लाख रुपये की वसूली भी हो चुकी है।
- साथ ही, 87 किसानों के रिकॉर्ड में “रेड एंट्री” की गई है, जिससे उन्हें दोबारा नियम तोड़ने से रोका जा सके।
प्रदूषण नियंत्रण में वाहन चालकों पर सख्ती
जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच 3,25,989 वाहनों के चालान जारी किए गए हैं, जिनके पास वैध Pollution Under Control (PUC) सर्टिफिकेट नहीं था।
सरकार ने साफ संदेश दिया है कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अब सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
19 स्थानों पर नई आग की घटनाएं
शुक्रवार को हरियाणा में 19 स्थानों पर नई आग की घटनाएं दर्ज की गईं।
इस प्रकार, कुल 224 एक्टिव फायर लोकेशन (AFL) के मामले सामने आए हैं।
सबसे अधिक मामले फतेहाबाद, हिसार और सोनीपत (3-3) में मिले हैं, जबकि कैथल में 2 और रोहतक व सिरसा में 1-1 मामला पाया गया है।
किसानों को मिल रही प्रोत्साहन योजनाएं
सरकार किसानों को मशीनों पर सब्सिडी, फसल विविधीकरण पर प्रोत्साहन राशि, और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक कर रही है।
साथ ही, पंचायत स्तर पर “पराली न जलाओ, मिट्टी बचाओ” अभियान चलाया जा रहा है।
कई जिलों में स्कूल और कॉलेज स्तर पर छात्रों को भी पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
लक्ष्य: 2027 तक पराली मुक्त हरियाणा
हरियाणा सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगले दो सालों में राज्य को “Zero Stubble Burning State” घोषित करने की दिशा में सभी विभाग मिलकर काम करेंगे।
इस दिशा में किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि धान की पराली अब प्रदूषण नहीं बल्कि ऊर्जा का स्रोत बने।
निष्कर्ष
हरियाणा का पराली प्रबंधन मॉडल देश के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। सरकार की दूरदर्शी नीतियों, किसानों के सहयोग और तकनीकी नवाचार के कारण आज पराली जलाने की घटनाओं में 77% तक की कमी दर्ज की गई है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले दो वर्षों में हरियाणा वाकई भारत का पहला “Zero Stubble Burning State” बन सकता है।
हरियाणा पराली प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण FAQs
- हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में कितनी कमी आई है?
2025 तक पराली जलाने की घटनाओं में 77% की कमी दर्ज की गई है।
- वायु गुणवत्ता आयोग की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
हरियाणा में पराली प्रबंधन की समीक्षा और आगामी रणनीति तय करना।
- बायो-डीकंपोजर पाउडर क्या है और इसका उपयोग कैसे होता है?
यह एक जैविक घोल है जो पराली को खेत में ही सड़ाकर मिट्टी में मिला देता है, जिससे पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ती।
- किसानों को कौन-कौन सी मशीनें दी जा रही हैं?
रोटावेटर, स्ट्रॉ बेलर, हैप्पी सीडर, सुपर एसएमएस जैसी आधुनिक मशीनें।
- सरकार ने पराली प्रबंधन पर कितना निवेश किया है?
2025-26 में कुल 250.75 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
- पराली आधारित बिजली संयंत्र कहां-कहां चल रहे हैं?
हरियाणा में 11 बायोमास पावर प्लांट, 1 एथेनॉल संयंत्र, 2 सीबीजी और 5 थर्मल पावर प्लांट पराली से ऊर्जा बना रहे हैं।
- ईंट भट्ठों में पराली का उपयोग कब तक अनिवार्य होगा?
2025 तक 20% और 2028 तक 50% पराली आधारित पेलेट्स का उपयोग अनिवार्य होगा।
- किसानों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
87 मामलों में 4.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और एफआईआर दर्ज की गई।
- क्या वाहन प्रदूषण पर भी नियंत्रण किया जा रहा है?
हां, 3.25 लाख से अधिक वाहनों के चालान PUC सर्टिफिकेट न होने पर किए गए हैं।
- सरकार का अगला लक्ष्य क्या है?
अगले दो वर्षों में हरियाणा को “Zero Stubble Burning State” बनाना और वायु प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर लाना।
Thanks for visiting – Chandigarh News


Terrific work! This is the type of information that should be shared around the internet. Shame on Google for not positioning this post higher! Come on over and visit my site . Thanks =)