Chandigarh Mayor Election 2025: आप और भाजपा के बीच टक्कर, प्रेमलता और हरप्रीत बबला आमने-सामने
Chandigarh Mayor Election 2025: चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव के लिए राजनीतिक पारा चरम पर है। आम आदमी पार्टी (आप) ने मेयर पद के लिए प्रेमलता को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि भाजपा ने हरप्रीत कौर बबला को मैदान में उतारा है। यह चुनाव 29 जनवरी को होने वाला है, और इसे लेकर सभी दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।
प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबले की स्थिति
मेयर पद:
आप: प्रेमलता
भाजपा: हरप्रीत कौर बबला
सीनियर डिप्टी मेयर पद:
कांग्रेस: जसबीर सिंह बंटी
भाजपा: बिमला दुबे
डिप्टी मेयर पद:
कांग्रेस: तरुणा मेहता
भाजपा: लखबीर बिल्लू
आप और कांग्रेस गठबंधन में दरार के संकेत
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में गठबंधन किया है। हालांकि, मेयर पद के लिए प्रेमलता को उम्मीदवार बनाए जाने पर कांग्रेस के कुछ पार्षदों में नाराजगी की खबरें सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब भवन में हुई बैठक के दौरान जब प्रेमलता के नाम की घोषणा की गई, तो कांग्रेस के कुछ पार्षद और आप की एक महिला पार्षद ने असंतोष जताया।
हालांकि, किसी ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी नहीं जताई है, लेकिन बैठक के माहौल से दोनों पार्टियों के बीच मतभेदों के संकेत मिल रहे हैं।
भाजपा और आप में सीधी टक्कर
भाजपा के लिए चंडीगढ़ मेयर पद का चुनाव काफी अहम है। पार्टी ने हरप्रीत कौर बबला को उम्मीदवार बनाकर महिला नेतृत्व पर जोर दिया है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने प्रेमलता को उम्मीदवार बनाकर अपनी राजनीतिक मजबूती दिखाने की कोशिश की है।
भाजपा ने मेयर चुनाव के लिए अपने पार्षदों के साथ कई बैठकों का आयोजन किया है। पार्टी को उम्मीद है कि उसके रणनीतिक प्रयास उसे जीत दिला सकते हैं।
पार्षदों का गणित और संभावनाएं
चंडीगढ़ नगर निगम में कुल पार्षदों की संख्या: 35
आप और कांग्रेस गठबंधन की सीटें: 14 (आप-13, कांग्रेस-1)
भाजपा: 14
अन्य निर्दलीय: 7
इस समीकरण में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
29 जनवरी को होगा चुनाव
मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव 29 जनवरी को होंगे।
चुनाव का परिणाम चंडीगढ़ की राजनीतिक स्थिति को स्पष्ट करेगा।
आप और भाजपा के बीच सीधी टक्कर इस चुनाव को और रोचक बना रही है।
निष्कर्ष
चंडीगढ़ मेयर चुनाव केवल एक पद का चुनाव नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में राजनीतिक दलों की ताकत और गठबंधन की स्थिरता को भी परखने का मौका है। जहां भाजपा अपने किले को बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आने की कोशिश में है।
अब देखना यह होगा कि निर्दलीय पार्षद किसका साथ देते हैं और इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में कौन बाजी मारता है।
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