Chandigarh Municipal Corporation: चंडीगढ़ नगर निगम का वित्तीय संकट: गोलचक्करों से होगी कमाई, मेयर का नया प्लान
Chandigarh Municipal Corporation: चंडीगढ़ नगर निगम इस समय गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि जल्द ही निगम के पास अपने कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए पैसे नहीं बचेंगे। इस संकट से उबरने के लिए नगर निगम ने राजस्व बढ़ाने के नए उपाय तलाशने शुरू कर दिए हैं।
गोलचक्करों से होगी कमाई, निगम ने बनाई नई योजना
Chandigarh News: नगर निगम ने अपनी आय में वृद्धि के लिए शहर के गोलचक्करों से कमाई करने की योजना बनाई है। इसके तहत गोलचक्करों पर विज्ञापन होर्डिंग्स लगाने की वार्षिक फीस तय की जाएगी। यह प्रस्ताव चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को भेजा जाएगा, जिनकी मंजूरी के बाद इस योजना पर काम शुरू होगा।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल नगर निगम के साथ हुए समझौते के तहत प्राइवेट कंपनियां गोलचक्करों का रखरखाव करती हैं और अपने ब्रांड के विज्ञापन वाले बोर्ड लगाती हैं। लेकिन अब नगर निगम ने फैसला किया है कि इन विज्ञापनों से सालाना 4-5 करोड़ रुपये की कमाई की जाएगी।
प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद बढ़ेगा काम
चंडीगढ़ की मेयर हरप्रीत कौर बाबला और कुछ पार्षदों ने आय बढ़ाने के इस प्लान को तैयार किया है। सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी ने बताया कि गोलचक्करों को तय राशि पर आउटसोर्स करने का प्रस्ताव है। इसमें चारों दिशाओं में जमीन से डेढ़ फुट ऊंचे विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति होगी। केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक से मंजूरी मिलने के बाद इस योजना को अमल में लाया जाएगा।
नए नियम और प्रक्रियाएं
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक,
- गोलचक्करों को नीलामी प्रक्रिया के तहत विज्ञापन कंपनियों को सौंपा जाएगा।
- मौजूदा फर्में नई फीस जमा कर अपना काम जारी रख सकेंगी।
- अन्य क्षेत्रों में भी विज्ञापन नीति बनाई जा रही है, जिससे अतिरिक्त आय हो सके।
वित्तीय संकट से राहत मिलेगी
नगर निगम गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है और जल्द ही स्टाफ की सैलरी देना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में विज्ञापनों से मिलने वाली आय नगर निगम के वित्तीय बोझ को कम करने में मदद करेगी। साथ ही, इससे शहर की सड़क संरचना के रखरखाव में भी सुधार आएगा।
अब देखना होगा कि इस योजना को कब तक मंजूरी मिलती है और नगर निगम को इससे कितनी राहत मिलती है।
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