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]]>Pet Me Acidity Ho To Kya Kare – असंतुलित और अव्यवस्थित आहार कई तरह की समस्याओं को जन्म दे सकता है। सामान्य दिखने वाली समस्याएं अगर अनियंत्रित छोड़ दी जाएं तो गंभीर हो सकती हैं। एसिडिटी भी इसी का एक रूप है.
शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो एसिडिटी से अछूता हो। इस लेख में हम एसिडिटी के बारे में ही बात कर रहे हैं। इसके साथ ही यहां हम एसिडिटी के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार भी बताएंगे।
हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि इन उपायों से एसिडिटी की समस्या (Problem of Acidity in Hindi) कुछ हद तक कम हो सकती है, लेकिन गंभीर स्थिति में इलाज किया जा सकता है। पेट में एसिड बनना केवल डॉक्टरी सलाह पर निर्भर करता है ।
एसिडिटी में ले यह दवाई, मिलेगा आराम
तो आइए पेट में एसिड बनने का इलाज जानने से पहले जान लें कि एसिडिटी क्या है ।
एसिडिटी को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (Gastroesophageal Reflux Disease – GERD) के नाम से जाना जाता है। एक शोध में पाया गया कि एसिडिटी की समस्या एशियाई देशों में लगभग 5 प्रतिशत और पश्चिमी देशों में 10 से 20 प्रतिशत हो सकती है।
यह समस्या तब होती है जब लोअर एसो फेजियल स्फिंक्टर (Lower Esophageal Sphincter – एक प्रकार की नली जो गले और पेट को जोड़ती है) कमजोर हो जाती है और इससे पेट में मौजूद एसिड ऊपर की ओर आ जाता है।
इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि आदतें जैसे मसालेदार खाना खाना, धूम्रपान करना, ज्यादा चॉकलेट खाना, शराब का सेवन, सही समय पर खाना न खाना, रात में खाना या गतिहीन जीवनशैली से एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है, जिसके कारण पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, सीने में जलन और बेचैनी महसूस हो सकती है।
एसिडिटी के कारणों और पेट में जलन के कारणों को समझें ।
एसिडिटी कई समस्याओं का कारण बन सकती है, लेकिन एसिडिटी किन कारणों से होती है यह एक अहम सवाल है। अगर एसिडिटी के कारणों को समझ लिया जाए तो इससे बचना आसान हो सकता है। इसलिए यहां हम कुछ बिंदुओं के जरिए एसिडिटी के कारण बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं :
मोटापे अधिक वजन, या गर्भवती होने से पेट पर दबाव बहुत बढ़ जाता है और एसिड अन्नप्रणाली (Food Pipe) में आ सकता है।
पेट में जलन किन कारणों से होती है, इसका एक कारण कई प्रकार की दवाएं हो सकती हैं। इन दवाओं में मुख्य रूप से अस्थमा का इलाज, एलर्जी के लक्षणों का इलाज, उच्च रक्तचाप का इलाज, नींद में सहायता और एंटी डिप्रेशन टेबलेट्स शामिल हैं।
तो यह थे एसिडिटी के कारण, अब आगे हम एसिडिटी के लक्षण बता रहे हैं।
गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (Gastroesophageal Reflux Disease) यानी एसिडिटी का सामान्य लक्षण छाती और पेट के बीच में जलन और दर्द है। इसके अलावा एसिडिटी के कई लक्षण देखे जा सकते हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं :
Home Remedies for Acidity in Hindi – लोग अक्सर एसिडिटी का तुरंत इलाज करने के लिए प्राथमिक उपचार के रूप में घरेलू उपचारों को महत्व देते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे घरेलू उपचारों के बारे में नहीं जानते हैं।
यहां हम कुछ आसान और प्रभावी घरेलू उपचार बता रहे हैं। वहीं, हम स्पष्ट कर दें कि एसिडिटी के लिए घरेलू उपचार एसिडिटी की समस्या को दूर करने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन अगर समस्या गंभीर है तो डॉक्टरी सलाह लें।
सामग्री:
तरीका:
कैसे है फायदेमंद:
बेकिंग सोडा को सोडियम बाइकार्बोनेट (Sodium Bicarbonate) के नाम से भी जाना जाता है। इसमें एंटासिड यानी एसिडिटी से राहत देने वाले गुण होते हैं। बेकिंग सोडा का यह गुण पेट में बनने वाले एसिड के इलाज में कारगर हो सकता है।
इसके अलावा, सोडियम बाइकार्बोनेट को दिल की जलन, एसिड और अपच से राहत देने के उपाय के रूप में उपयोगी माना जाता है । .
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तरीका:
कैसे है फायदेमंद:
मुलेठी को एसिडिटी के लिए एक आयुर्वेदिक दवा भी माना जा सकता है। दरअसल, मुलेठी का उपयोग प्राकृतिक चिकित्सा में एसिडिटी सहित कई समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है।
एक शोध के अनुसार, मुलेठी की जड़ या अर्क का उपयोग गैस्ट्रिक सूजन के इलाज के लिए फायदेमंद हो सकता है। शोध से पता चलता है कि मुलेठी में गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव गुण (Gastroprotective Properties) होते हैं, जो एसिडिटी से बचाने में भी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, एक अन्य अध्ययन के अनुसार, मुलेठी की जड़ में मिनरलोकॉर्टिकोइड्स (Mineralocorticoids) होते हैं, जो प्रो के उत्पादन को नियंत्रित करके गैस्ट्रिक सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
स्टैग्लैंडिन और लिपोक्सिनेज (Staglandin and Lipoxygenase – एंजाइम के प्रकार)। इसके साथ ही, मुलेठी एसिड की अधिकता को कम करने में भी मदद करती है। इस आधार पर, यह माना जा सकता है कि मुलेठी का उपयोग एसिडिटी के घरेलू उपचार (Acidity ka Gharelu Ilaj) के लिए भी किया जा सकता है ।
एसिडिटी में ले यह दवाई, मिलेगा आराम
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तरीका:
कैसे है फायदेमंद:
एलोवेरा के उपयोग और फायदों के बारे में लगभग हर कोई जानता है। वहीं, इसका उपयोग एसिडिटी के घरेलू उपचार के लिए भी किया जा सकता है। कई संस्थानों ने एलोवेरा पर अलग-अलग तरह के शोध किए हैं।
इन सभी शोधों को एकत्र करके एक शोध पत्र तैयार किया है और शोध पत्र के अनुसार, एलोवेरा जेल में गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव गुण (Gastroprotective) होते हैं। इस वजह से, एलोवेरा जेल का यह गुण एसिटिक एसिड और गैस्ट्रिक अल्सर की समस्या (Problem of Gastric Ulcer in Hindi) को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह एसिडिटी के घरेलू उपचार में भी फायदेमंद हो सकता है ।
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तरीका:
कैसे है फायदेमंद:
समस्याओं जैसे कब्ज, पेट फूलना, गैस्ट्रिक अल्सर, अपच, मतली और उल्टी से राहत दिलाने में फायदेमंद हो सकते हैं। इसके अलावा, एक अन्य शोध से पता चलता है कि अदरक में सूजन को कम करने वाला तत्व होता है।
इंफ्लामेशन मॉड्यूलेटर (Inflammation Modulator), जो क्षतिग्रस्त पेट के ऊतकों की मरम्मत और एसिडिटी के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इस आधार पर, यह माना जा सकता है कि अदरक एसिडिटी की समस्या को कम करने और इसके प्रभाव को दूर रखने में फायदेमंद साबित हो सकता है ।
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तरीका:
कैसे है फायदेमंद:
स्लिपरी एल्म के बारे में शायद ही बहुत से लोग जानते हों। यह एक पेड़ का नाम है जिसकी छाल और पत्तियों के साथ-साथ पेड़ की जड़ का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।
स्लिपरी एल्म की छाल में कई औषधीय गुण होते हैं, जो घर पर एसिडिटी का इलाज करने में भी सहायक हो सकते हैं। एक शोध के अनुसार, स्लिपरी एल्म की छाल एसिडिटी की गंभीर स्थिति हाइपरएसिडिटी से सुरक्षा प्रदान करने में फायदेमंद हो सकती है।
इस आधार पर, यह माना जा सकता है कि स्लिपरी एल्म का उपयोग एसिडिटी की गंभीर स्थिति के रूप में किया जा सकता है। यह एसिडिटी से राहत पाने का एक अन्य विकल्प है.
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तरीका:
कैसे है फायदेमंद:
अजवायन को मेरिडियन सौंफ और पर्शियन जीरा के नाम से भी जाना जाता है। कई तरह की समस्याओं को दूर करने के साथ-साथ अजवायन को पेट के लिए भी उपयोगी माना गया है।
एक शोध में पाया गया है कि अजवायन का उपयोग पारंपरिक रूप से बदहजमी के इलाज के लिए किया जा सकता है। इनमें पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण (Anti-Inflammatory and Antioxidant Properties) पेट में अतिरिक्त गैस्ट्रिक एसिड के उत्पादन को रोक सकते हैं। इस आधार पर, यह माना जा सकता है कि अजवायन एसिडिटी की समस्या को दूर करने में भी सहायक हो सकता है।
एसिडिटी में ले यह दवाई, मिलेगा आराम
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तरीका:
कैसे है फायदेमंद:
शरीर में सूजन की समस्या गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (Gastroesophageal Reflux Disease) का कारण हो सकती है। एनसीबीआई पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, शरीर में सूजन की समस्या नाइट्रिक ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से हो सकती है।
यह ऊतक या कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है, जिसमें एसिडिटी की समस्या भी शामिल है। इसे कम करने के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट फायदेमंद हो सकते हैं।
वहीं, कैमोमाइल की बात करें तो इसमें पुरानी सूजन को कम करने का प्रभाव होता है। कारण कैमोमाइल में मौजूद होता है। फ्लेवोनोइड्स, जो एक एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट के रूप में कार्य करते हैं।
इस कारण कैमोमाइल चाय का सेवन शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के प्रभाव को कम करके सूजन से राहत दिला सकता है। इस आधार पर, यह माना जा सकता है कि आंतों में सूजन के कारण होने वाली गैस्ट्रिक एसिडिटी (Gastric Acidity) की स्थिति में कैमोमाइल चाय का उपयोग हानिकारक हो सकता है।
सामग्री:
तरीका:
कैसे है फायदेमंद:
लेमन बाम एक प्रकार की जड़ी-बूटी है। इसकी गंध और स्वाद नींबू की तरह होता है। लेमन बाम का उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने के अलावा एसिडिटी से राहत पाने के लिए भी किया जा सकता है।
दरअसल, एक शोध के अनुसार, लेमन बाम का अर्क मोटापा कम करने में कारगर हो सकता है और वहीं, लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि अत्यधिक वजन भी पेट में एसिडिटी का कारण हो सकता है। ऐसे में लेमन बाम के फायदे मोटापे की समस्या से राहत दिलाकर एसिडिटी के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं ।
सामग्री:
विधि:
कैसे है फायदेमंद:
एंजेलिका रूट की जड़ों में मुख्य रूप से डेकार्सिन (वसा भंडारण को रोकता है) नामक एक सक्रिय एक्टिव कंपाउंड होता है, जो कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में प्रभावी है। हाइपरलिपिडिमिया (hyperlipidemia) (रक्त में फैट और लिपिड की असंतुलित मात्रा) के अलावा, यह तत्व मोटापे को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है।
साथ ही मोटापा, एसिडिटी के कारणों में से एक है। इस आधार पर एंजेलिका रूट के फायदे मोटापे की समस्या (Problem of Obesity in Hindi) को कम करके एसिडिटी में भी सकारात्मक प्रभाव दिखा सकते हैं।
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तरीका:
दूध को गर्म करें और ठंडा होने पर पी लें।
पेट की एसिडिटी का घरेलू इलाज (Pet ki Acidity ka Desi Ilaj) करने के लिए नियमित रूप से ठंडे दूध का सेवन किया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद:
एक शोध के अनुसार, दूध में एंटासिड प्रभाव होता है। वहीं, ठंडा दूध पीने से यह प्रभाव अधिक देखा जा सकता है, जो अपच, पेट में सूजन के साथ-साथ एसिडिटी और पेट से जुड़ी अन्य समस्याओं से राहत दिलाने में कारगर हो सकता है। इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि ठंडा दूध पीने के फायदे से एसिडिटी से राहत मिल सकती है ।
विधि:
1 चम्मच सौंफ के बीज (2 से 5 ग्राम)
एक गिलास पानी
तरीका:
पानी में सौंफ के दाने डालकर उबाल आने तक गर्म करें.
फिर सौंफ को पानी में छानकर चाय की तरह पिएं।
इसके अलावा एसिडिटी का घरेलू इलाज (Acidity ka Desi Ilaj) करने के लिए खाना खाने के बाद सौंफ के दाने के पाउडर का भी सेवन किया जा सकता है।
कैसे है फायदेमंद:
सौंफ अपियासी परिवार (Apiasi Family) से संबंधित एक प्रकार की जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग लंबे समय से भूख को नियंत्रित करने के लिए किया जाता रहा है।
एक शोध पत्र के अनुसार, सौंफ के सेवन से भूख को दबाया जा सकता है। इसके भूख को नियंत्रित करने वाले प्रभाव से बढ़े हुए वजन को आसानी से कम करने में मदद मिल सकती है।
जबकि अधिक वजन एसिडिटी का कारण बन सकता है। इन दोनों तथ्यों को देखते हुए, यह माना जा सकता है कि सौंफ का उपयोग एसिडिटी के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है ।
एसिडिटी में ले यह दवाई, मिलेगा आराम
सामाग्री:
विधि:
कैसे है फायदेमंद:
जीरा एसिडिटी की समस्या से राहत दिलाने में भी फायदेमंद हो सकता है। दरअसल, एक अध्ययन में इस बात का जिक्र किया गया है कि जीरा बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और एलडीएल (Cholesterol, Triglyceride and LDL – कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन) को कम करके मोटापे से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
वहीं, मोटापा भी एसिडिटी का एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। इस आधार पर, यह कहा जा सकता है कि जीरा एसिडिटी के घरेलू उपचार (Acidity ka Gharelu Upchaar) के रूप में उपयोगी साबित हो सकता है।
एसिडिटी के घरेलू उपाय के बाद हम लेख के अगले भाग में आपको एसिडिटी का इलाज बता रहे हैं।
एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार निस्संदेह समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकता है, लेकिन समस्या गंभीर होने पर डॉक्टरी सलाह से एसिडिटी का इलाज कराना जरूरी है। एसिडिटी के लक्षणों की गंभीरता के आधार पर डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव, दवा और सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। हम इसके बारे में नीचे विस्तार से बता रहे हैं):
जीवनशैली में बदलाव: दिनचर्या में बदलाव करके एसिडिटी के लक्षणों को कम किया जा सकता है, जो इस प्रकार हैं:
वजन कम करना – मोटापा कम करने के उपाय के रूप में संतुलित आहार और नियमित व्यायाम का सहारा लिया जा सकता है।
आरामदायक कपड़े – आरामदायक कपड़े पहनें, ताकि पेट पर दबाव न पड़े। पेट पर दबाव पड़ने से एसिड ऊपर की ओर आ सकता है।
खाना खाने के बाद 3 घंटे तक सीधे रहने की कोशिश करें। खाने के तुरंत बाद सोने या आराम करने से एसिडिटी हो सकती है।
एसिडिटी का स्थायी इलाज पाने के लिए जहां तक संभव हो धूम्रपान से बचें।
दवाएँ: एसिडिटी के लिए कई अंग्रेजी दवाएँ हैं, जो एसिडिटी की समस्या (Problem of Acidity in Hindi) को कम करने में फायदेमंद हो सकती हैं, लेकिन इन दवाओं को डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। इनमें से कुछ दवाएँ इस प्रकार हैं:
एंटासिड : हल्के एसिडिटी के लक्षणों में डॉक्टर एंटासिड लेने की सलाह दे सकते हैं।
H2 ब्लॉकर्स: H2 ब्लॉकर्स एसिड के उत्पादन को कम कर सकते हैं । इसके अलावा, ये दवाएं फ़ूड पाइप को हुए नुकसान को ठीक करने में भी मदद कर सकती हैं।
ध्यान दें: यदि खाने के बाद सीने में जलन होती है, तो डॉक्टर एक एंटासिड और एक एच2 ब्लॉकर लिख सकते हैं। एंटासिड पेट के एसिड को बेअसर करते हैं और एच2 ब्लॉकर पेट में एसिड उत्पादन को रोकते हैं।
प्रोटॉन पंप अवरोधक (Proton Pump Inhibitors – पीपीआई): ये पेट में उत्पादित एसिड की मात्रा को कम करते हैं। पीपीआई दवाएं एच2 ब्लॉकर्स (H2 Blockers) की तुलना में जीईआरडी (अम्लता) के लक्षणों का इलाज करने में बेहतर हो सकती हैं।
ध्यान दें: अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग लंबे समय तक या उच्च खुराक में पीपीआई लेते हैं, उनमें कूल्हे, कलाई और रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने की संभावना अधिक होती है।
प्रोकेनेटिक्स : प्रोकेनेटिक्स एसिड (Prokinetics Acid) की मात्रा को कम करने में मदद कर सकता है।
ध्यान दें: यह दवाइयां दस्त, मतली, थकान महसूस करना, अवसाद और चिंता जैसे दुष्प्रभाव पैदा कर सकती हैं ।
एंटीबायोटिक्स: एंटीबायोटिक्स भी एसिड रिफ्लक्स को कम करने में मदद कर सकते हैं।
ध्यान दें: कुछ मामलों में यह दस्त का कारण बन सकता है।
दोस्तों, अब अब अंत में हम एसिडिटी से बचाव के कुछ खास उपाय बता रहे हैं।
कुछ खास और जरूरी टिप्स को अपनी जीवनशैली में शामिल करके एसिडिटी की इस समस्या से बचा जा सकता है।एसिडिटी से बचाव से जुड़ी इन बातों का रखना होगा ध्यान
गैस – एसिडिटी के लक्षणों से बचने के लिए सही खान-पान का चयन करें, जैसे:- ऑयली और मसालेदार भोजन और मादक पेय पदार्थों से परहेज करें।
जीवनशैली में बदलाव (Change in Lifestyle) से एसिडिटी के लक्षणों को कम किया जा सकता है। अपनी जीवनशैली को आदर्श और व्यवस्थित बनाना चाहिए और इसमें रोजाना व्यायाम, योग और प्राणायाम को शामिल करना चाहिए। इस तरह की दिनचर्या कई तरह की बीमारियों को दूर रखने में मदद कर सकती है।
इस लेख से यह स्पष्ट है कि एसिडिटी की समस्या (Problem of Acidity in Hindi) बिगड़ती जीवनशैली और खराब खान-पान के कारण हो सकती है। ऐसे में अगर समय रहते इसकी रोकथाम की जाए, तो एसिडिटी के गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
वहीं, लेख में एसिडिटी के घरेलू उपाय (Home Remedies of Acidity in Hindi) भी बताए गए हैं, जिनके इस्तेमाल से इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।
इसके अलावा, अगर समस्या गंभीर है, तो डॉक्टर से एसिडिटी का इलाज कराने में बिल्कुल भी देरी न करें। आशा है कि एसिडिटी के घरेलू उपचार से जुड़ा यह लेख आपको पसंद आया होगा। आप इस लेख को अन्य लोगों के साथ जरूर शेयर करें ।
एसिडिटी में ले यह दवाई, मिलेगा आराम
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:-
हां, जैसा कि लेख में बताया गया है, एसिडिटी के घरेलू उपचारों में से एक दूध पीना भी शामिल है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि दूध पीने के फायदे एसिडिटी से राहत दिलाने में सहायक हो सकते हैं।
जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भोजन के आधे घंटे बाद शुगर-फ्री च्युइंग गम चबाने से एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
यदि लेख में बताए गए एसिडिटी के घरेलू उपाय करने और जीवनशैली में बदलाव करने के बाद भी एसिडिटी के लक्षण बने रहते हैं, तो बिना देर किए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। इसके अलावा, निम्नलिखित स्थितियों में भी चिकित्सा उपचार आवश्यक हो सकता है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं :
खाद्य पदार्थ जो किडनी में एसिड की मात्रा बढ़ा सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। इनमें से कुछ खाद्य पदार्थ हैं
ईनो एक व्यावसायिक उत्पाद है, जिसे एसिडिटी की दवा माना जाता है। निर्माता के अनुसार, इसका अम्लीय प्रभाव और इसमें मौजूद कुछ खनिज पेट की एसिड को बेअसर करने में मदद कर सकते हैं।
इसके अलावा, इसमें एंटासिड प्रभाव भी होता है, जो एसिडिटी की समस्या को कम करने में प्रभावी हो सकता है। ईनो के अलावा आप पतंजलि एसिडिटी पाउडर भी ले सकते हैं।
एसिडिटी होने पर विटामिन सी युक्त फल खाना फायदेमंद हो सकता है । इसके लिए निम्नलिखित फलों का सेवन किया जा सकता है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं :
लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि विटामिन सी युक्त भोजन का सेवन करने से एसिडिटी से राहत मिल सकती है। वहीं, नींबू में भी विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि नींबू का उपयोग एसिडिटी के इलाज में फायदेमंद हो सकता है।
एसिडिटी का घरेलू इलाज करने के लिए विटामिन सी युक्त फलों के रस को तरल के रूप में पिया जा सकता है। इसके अलावा आप नींबू, लेमन बाम, कैमोमाइल, एंजेलिका रूट और सौंफ से बनी औषधीय चाय भी पी सकते हैं। इसके बारे में आपको पहले ही आर्टिक ले में बताया जा चुका है।
दोस्तों उम्मीद है आपको हमारी यह पोस्ट “Pet Me Acidity Ho To Kya Kare – Acidity Home Remedies in Hindi” पसंद आई होगी.
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