The post Career in Rural Management: रुरल मैनेजमेंट में करियर के बेस्ट कोर्स और जॉब ऑप्शन्स appeared first on Chandigarh News.
]]>Rural Management Course – रूरल मैनेजमेंट (Rural Management) के ज्यादातर कोर्सेज को इस तरह से बनाया गया है के पढ़ाई गई चीजों और बातो को ट्रेनिंग, केस स्टडी, सर्वे, और ग्रामीण लोगों से बनाये गए पारस्परिक व्यवहार द्वारा वास्तविक जीवन में लागू किया जा सके।
दोस्तों हमारे भारत देश को आजाद हुए 70-72 साल से ज्यादा हो चुके है, लेकिन हमारे देश में आज भी जीडीपी में एग्रीकचर (Agriculture) की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी से 55 फीसदी है।
वहीं करीब लगभग 70 प्रतिशत देश की आबादी अभी भी गांवों में ही रहती है और आधे से ज्यादा वर्कफोर्स के लिए रोजगार का जरिया भी यही लोग है।
आजादी के बाद के शुरुआती दशकों में गाँव के भारत में विकास की रफ्तार बेहद ही कम होने के चलते देश का आर्थिक विकास और तरक्की प्रभावित हुआ, परन्तु अब हालात बदल चुके हैं और पहले जी नहीं रहे है।
पिछले एक दशक में ही लगभग 75 प्रतिशत के आस पाद नई फैक्ट्रियां ग्रामीण क्षेत्रों में ही खोली गई हैं। वही, वर्ष 2015 के बाद से गाँव के क्षेत्रों में जीडीपी विकास की रफ़्तार भी काफी अधिक रही हैं। हालांकि कोरोना की बीमारी के बाद यह बेहद बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।
कोरोन के पहले एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, जिसमें बताया गया था के ग्रामीण भारत में जीडीपी 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक का महतवपूर्ण योगदान दे सकता है।
ग्रामीण इलाको में आर्थिक विकास और सामाजिक विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स (rural management professionals) की बेहद जरूरत है।
आज भी भारत की लगभग दो- तिहाई के आस पास की जनसंख्या गांवों में ही रहती है और भारत के कुल जीडीपी में लगभग आधी के बराबर हिस्सेदारी गांवों की है।
दोस्तों, देश का समावेशी विकास तभी तक संभव है, जब विकास की सम्पूर्ण रोशनी गांव-गांव तक सबतक पहुंचे। और इसी करना से ग्रामीणों की तरक्की के लिए भारत देश की केंद्र सरकार ने रूलर मैनेजमेंट कोर्स (rural management course) शुरू किया है।
इस कोर्स में जिसमें छात्रों को यह बताया जाता है के किस प्रकार से ग्रामीण संसाधनों का आसानी से और कुशलतापूर्वक उपयोग करना चाहिए, ताकि हम इनका अधिक से अधिक फायदा उठा सकें।
इसका पाठ्यक्रम मुख्यत: ग्रामीण विकास, प्लानिंग, आयोजन, निर्देशन, सहकारी कृषि व्यवसाय, वित्तीय संस्थाओं और संबद्ध क्षेत्रों के नियंत्रण के अध्ययन (Rural development, planning, planning, directing, co-operative agribusiness, control of financial institutions and allied sectors) को समावेशित करता है।
अगर आप रूरल मैनेजमेंट का कोर्स (rural management course) करना चाहते हैं, तो भारत देश के किसी भी संस्थान से यह डिग्री और डिप्लोमा कोर्सेज आसानी से कर सकते हैं।
इनमें मुख्य कोर्स के तौर पर आप यह कोर्सेज जैसे के एमबी इन रूरल मैनजमेंट, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रोग्राम इन रूरल डेवलपमेंट मैनेजमेंट, मास्टर ऑफ रूरल मैनेजमेंट, और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रूरल मार्केटिंग (MB in Rural Management, Master of Rural Management, Post Graduate Diploma Program in Rural Development Management and Post Graduate Diploma in Rural Marketing) लोकप्रिय हैं।
इन कोर्सेज में संबंधित संस्थानो द्वारा स्वयं संचालित प्रवेश परीक्षा, साक्षात्कार एवं ग्रुप डिस्कशन के आधार पर ही आपका नामांकन होता है।
इन प्रवेश परीक्षाओं (entrance exams) में शामिल होने के लिए प्रतियोगी का किसी भी विषय में स्नातक होना या फिर समकक्ष होना बेहद ज़रूरी है। कुछ संस्थान तो पत्राचार द्वारा भी इन कोर्सेज को करवाते हैं।
दोस्तों, अगर आप इस फील्ड में आगे बढ़़ना चाहते हैं तो आपको कई प्रकार की स्किल्स के साथ-साथ कुछ ऐसी योग्यताओं की भी जरूरत पड़ेगी जो आपकी सभी जरूरतो को पूरा करेंगी।
इसके लिए आपको मुख्य तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने की इच्छा का होना और उत्सुकता के साथ-साथ आपको कई अन्य स्किल्स को बढ़ाने की भी जरूरत पड़ेगी। जिसमें के बातचीत करने की की कला, स्थानीय रीति-रिवाजों को समझना और उनके प्रति संवेदनशीलता होना, विभिन्न प्रकार के लोगों में घुल-मिल जाना इत्यादि।
अन्य प्रबंधन कोर्सेज (management courses) की तरह यहां भी विश्लेषण की क्षमताए नेतृत्व क्षमता, समस्या निष्पादन क्षमता (Analytical Ability, Leadership Ability, Problem Solving Ability) आदि लाभप्रद होती हैं।
इस क्षेत्र में छात्रों के लिए बहुत ही बढ़िया करियर के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। यह प्रबंधन के सभी कार्यात्मक क्षेत्रों में काम करते हैं, जैसे के मानव संसाधन, सिस्टम, परचेज, मार्केटिंग, सामान्य प्रबंधन, फाइनेंस, प्रोजेक्ट इ्प्लिलमेंटेशन (HR, Systems, Purchase, Marketing, General Management, Finance, Project Implementation) आदि।
इस क्षेत्र के छात्र सरकारी एवं गैर-सरकारी दोनों ही संस्थाओं में नीति निर्माता, मैनेजर, विश्लेषक, सलाहकार, शोधकर्ता (Policy Maker, Manager, Analyst, Consultant, Researcher) आदि के रूप में कार्य कर सकते हैं।
इसके अलावा भी इस फील्ड में आपके पास सरकारी क्षेत्र में ग्रामीण विकास की योजनाओं पर कार्य करना, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य सेवा को देखना और शिक्षा सम्बंधित कार्यो को करने का अवसर होता है।
गाँव के क्षेत्रों में काम करने वाले बैंक भी इस इलाके के विशेषज्ञों को बतौर प्रबंधक (manager) नियुक्त करते हैं। प्रतिभाशाली युवाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ, अंतरराष्ट्रीय एनजीओ और उससे जुड़ी एजेंसियों (United Nations, International NGOs and its affiliated agencies) में भी जाने का मौका होता है।
निजी कंपनियों (private companies) को भी आधुनिक संचार व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण इलाको में बाजार की अपूर्व संभावनाएं दिखाई दे रही हैं, जिसके लिए उन्हें प्रशिक्षित प्रतिभाओ की जरूरत होती है।
कई प्रकार के स्वयंसेवी संगठन अपने गाँव में ग्रामीण प्रबंधक के रूप में ऐसे लोगों की नियुक्ति करते हैं, जो के गांवों में विकास की योजना को लागू करवा उन्हें अमलीजामा पहना सकें।
योग्य उम्मीदवारों के लिए दुग्ध उत्पादन, तिलहन, गन्ना उत्पादन समितियों इत्यादि के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर हैं। रूरल मैनेजमेंट (rural management) में स्नातक के बाद आप सरकारी और निजी संगठनों (government or private job) के साथ एडवाइजरी, रिसर्च और कंसल्टेंसी के कार्य भी कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आप चाहें तो अपना खुद का एनजीओ भी खोल सकते हैं।
दोस्तों अगर आप इस फील्ड में आना चाहते है तो आपको पता होना चाहिए के इसमें शुरुआती सालाना पैकेज चार लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक होता है।
और वहीं अगर आपने किसी शीर्ष संस्थानों से कोर्स किया है तो यहाँ आपको सात लाख रुपये से आठ लाख रुपये तक सालाना पैकेज आसानी से मिल सकता है।
इस क्षेत्र में दो से तीन साल का अनुभव एवं अच्छे कार्य- प्रदर्शन के द्वारा आप लगभग 10 लाख रुपये से लेकर 15 लाख रूपये तक सालाना कमाई कर सकते है। वहीं अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सालाना पैकेज इससे भी कहीं ज्यादा होता है।
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